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प्रोजेक्ट पड़ताल :  मनपा की सड़क सीमेंटीकरण योजना फेल…५,१०० करोड़ रुपए गड्ढे में!.. शहर में हैं ७ हजार पॉटहोल्स

ब्रिजेश पाठक

इस वर्ष के मनपा बजट में सड़कों के लिए ५,१०० करोड़ रुपए दिए गए हैं, लेकिन शहर में रास्तों की हालत खस्ता है। मानसून आते ही मनपा की पोल खुल गई और पूरा शहर गड्ढों की चपेट में आ गया। अब तक शहर में लगभग ६,८०० गड्ढों की शिकायत मनपा को मिली है। इसमें से ३,४६१ गड्ढों की शिकायत मनपा के `माय पॉटहोल्स क्विक फिक्स’ ऐप के माध्यम से दर्ज की गई है। सड़क सीमेंटीकरण परियोजना बुरी तरह फेल हो गई, क्योंकि ५० प्रतिशत से अधिक सड़कों का सीमेंटीकरण तय समय में नहीं हो पाया।
`माय पॉटहोल क्विक फिक्स’ ऐप शुरू हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद मनपा ने इसका लाइव डैशबोर्ड सार्वजनिक रूप से लॉन्च किया, जिससे नागरिक गड्ढों से जुड़ी कुल शिकायतों का रियल टाइम डेटा देख सकते हैं। यह कदम ऐप का डेटा सार्वजनिक करने और पारदर्शिता बढ़ाने की मांगों के बाद उठाया गया।
११ जून को लॉन्च किए गए इस ऐप के जरिए नागरिक मानसून के दौरान बढ़ने वाले गड्ढों से संबंधित शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं। ऐप के अलावा नागरिक व्हॉट्सऐप चैटबॉट, सोशल मीडिया और मनपा के आपदा विभाग के नंबर पर भी अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं। एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद, मनपा का लक्ष्य है कि ४८ घंटे के भीतर गड्ढा ठीक कर दिया जाए। इसके लिए प्रत्येक २२७ वॉर्डों में एक सड़क अभियंता नियुक्त किया गया है।
तीन क्षेत्रों में कारण बताओ नोटिस जारी
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शिकायतों का समाधान न करने और गड्ढों की मरम्मत में विफल रहने पर कम से कम छह सब-इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस बांद्रा वेस्ट, धारावी और लिंकिंग रोड क्षेत्रों में लापरवाही के कारण जारी किए गए।
मात्र २,९६१ गड्ढों की हुई मरम्मत
मनपा के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जून में मानसून शुरू होने के बाद से मुंबई की सड़कों पर कुल ६,७५८ गड्ढे दर्ज किए गए हैं। इनमें से ३,२९७ गड्ढे नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा और ३,४६१ नागरिकों द्वारा ऐप पर दर्ज किए गए हैं। वहीं मनपा ने दावा किया है कि २,९६१ गड्ढों की मरम्मत की जा चुकी है और नागरिकों द्वारा दर्ज की गई कुल शिकायतों में से ३,२५२ का समाधान कर दिया गया है।

नोटिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गड्ढों को तुरंत पहचाना जाए और समय पर मरम्मत की जाए, ताकि वे बड़े न हो जाएं और नागरिकों को कोई असुविधा या जोखिम न हो। पिछले वर्षों की तुलना में गड्ढों की संख्या में कमी आई है।’
-अभिजीत बांगर (अतिरिक्त मनपा आयुक्त)

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