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मुस्लिम वर्ल्ड : सबसे बड़े मुस्लिम देश में क्यों भड़के दंगे?.. संसद तक फूंक दी गई!

सूफी खान

सड़कों पर प्रदर्शन, आगजनी और भयंकर हंगामा। ये सब हो रहा है दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में। अब सवाल ये उठता है कि इतना हिंसक प्रदर्शन करनेवाले हैं कौंन और क्यों ये प्रदर्शन हो रहा है? इतना ही नहीं, इंडोनेशिया के कई प्रमुख शहरों में स्टूडेंट्स ने मार्च निकाला है। दरअसल, पिछले हफ्ते हुई हिंसा के बाद सरकार की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया था। और तो और देश में हुई इस भयंकर हिंसा में ८ लोग मारे गए थे। ये इंडोनेशिया में बीते दो दशक में हुई सबसे बड़ी हिंसा है।
एक बड़ा खुलासा हुआ था कि इंडोनेशिया के ५८० सांसदों को सैलरी के अलावा हर महीने ५० लाख रुपए मकान भत्ते के रूप में मिल रहे हैं जो राजधानी के न्यूनतम वेतन से १० गुना ज्यादा है। महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता के लिए ये आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। इसके बाद लोग सड़कों पर उतर गए और प्रदर्शन करने लगे थे। ये मामला राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांटो के लिए गंभीर चुनौती बन गया है, जिन्होंने सालभर पहले ही पदभार संभाला है। बताया जा रहा है कि ३ दिन पहले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण तंगेरांग में इंडोनेशिया के वित्त मंत्री मुलयानी इंद्रावती समेत कई सांसदों के घरों में लूटपाट की थी। ऐसी ही घटनाओं की वजह से राष्ट्रपति सुबियांटो को अपनी चीन यात्रा तक रद्द करनी पड़ी है। इससे पहले २९ अगस्त को राजधानी जकार्ता में प्रदर्शन हुए थे। गुस्साई भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें पुलिस की बख्तरबंद गाड़ी एक डिलिवरी राइडर को कुचलती दिखाई थी।
हंगामों और प्रदर्शनकारियों के चलते ही देशभर में १,२०० से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। हिंसक प्रदर्शन में ७०० से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शन की वजह से इंडोनेशिया को २८.२२ करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। भारी सैन्य गश्त के बावजूद छात्रों ने जकार्ता, योग्याकार्ता, बांडुंग और मकास्सर में प्रदर्शन किए। जकार्ता की मुख्य सड़कों पर सेना तैनात है। स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लासेस लेने और कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया है।
एक्सपर्ट कहते हैं कि ये अशांति दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल मुल्क इंडोनेशिया की राजनीतिक व्यवस्था के प्रति गहरे असंतोष को उजागर करती है। सरकार पर व्यवस्था बनाए रखते हुए सुधार लागू करने का दबाव बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों की सख्ती के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी हैं। राष्ट्रपति सुबियांटो को सांसदों की सुविधाएं घटानी होंगी। शांति के लिए पहल करना अब राष्ट्रपति के हाथ में है क्योंकि अगर समय रहते कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया तो हालात काफी बदतर हो सकते हैं और इंडोनेशिया में हर तरफ सिर्फ और सिर्फ हिंसा और प्रदर्शन की तस्वीरें ही देखने को मिलेंगी।

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