मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति सरकार का झूठ बेनकाब!

महायुति सरकार का झूठ बेनकाब!

-आंदोलनकारियों पर दर्ज ४०० केस वापस लेने का वादा

-सालभर में एक भी मामला नहीं किया रद्द, अब २० दिन में होंगे निरस्त

सुनील ओसवाल / मुंबई

मराठा आरक्षण आंदोलन पर महाराष्ट्र की महायुति सरकार पूरी तरह बेनकाब हो गई है। मनोज जरांगे को आंदोलन खत्म करने के लिए दिया गया वादा ‘सभी केस वापस लेंगे’ महज एक जुमला साबित हुआ। मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज हुए ४०० से ज्यादा मामलों को वापस लेने का आश्वासन महायुति सरकार ने मनोज जरांगे को दिया था। लेकिन हकीकत ये है कि एक साल गुजर जाने के बावजूद एक भी मामला वापस नहीं लिया गया।
मुंबई में जरांगे का नया आंदोलन शुरू होते ही महायुति सरकार में हड़कंप मच गया। उपसमिति की समीक्षा में खुलासा हुआ कि जिलों में गठित समितियों ने अब तक एक भी केस की जांच पूरी नहीं की। ऐसेम में अब गृह मंत्रालय ने जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर २० दिन में रिपोर्ट देने को कहा है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
अक्टूबर २०१४ से मराठा समाज आरक्षण की लड़ाई शुरू हुई। आंतरावली सराटी में हुए लाठीचार्ज के बाद पूरे राज्य में गुस्से की लहर पैâली और हजारों आंदोलनकारियों पर केस दर्ज किए गए। तभी से जरांगे बार-बार इन मामलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
सरकार की मजबूरी
जरांगे के मौजूदा आंदोलन को देखते हुए लगता नहीं कि यह मुद्दा टलने वाला है। लिहाजा सरकार ने फिर नया वादा किया है कि १ से १.५ महीने में केस वापस ले लेंगे। जिलों से २० दिन में जानकारी मंगवाने का हड़कंप इसी रणनीति का हिस्सा है। जरांगे ने इस बार आर-पार की लड़ाई छेड़ी है। सरकार अब १ से १.५ महीने में केस वापस लेने का नया वादा गढ़ रही है। हालांकि, जो काम सालभर में नहीं हुआ, वो २० दिनों में वैâसे होगा? ऐसी चर्चा लोगों में हो रही है।
दबाव में सरकार की हालत खराब
२०१४ से आरक्षण के लिए संघर्षरत जरांगे के आंदोलन पर सरकार ने बार-बार समझौते किए, लेकिन आज तक एक भी केस वापस नहीं लिया गया। अब मुंबई में आंदोलन के तूल पकड़ते ही गृहमंत्रालय ने जिलाधिकारियों को आदेश थमा दिए हैं।

अन्य समाचार