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मुंबई की सफाई में ‘महायुति’ फेल…मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया ने मचाया गदर!

-संक्रामक रोगों में २५ फीसदी का उछाल

-गंदगी से लोगों का जीना हुआ मुहाल

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई की सफाई में महायुति सरकार फेल हो गई है। मानसून का कहर स्वास्थ्य मोर्चे पर भी जारी है। पिछले दो महीनों से हो रही बारिश ने शहर में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों की दहशत पैâला दी है, जिससे मुंबईकरों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इन कीट जनित रोगों में आए करीब २५ फीसदी के उछाल ने मनपा के तमाम दावों और तैयारियों की पोल खोल दी है।
मच्छरों को मारने में मनपा प्रशासन विफल
मानसून के मौसम में मुंबई में चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। मनपा की इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। मुंबईकर जानलेवा बीमारियों के साए में जीने को मजबूर है। जुलाई-अगस्त के दौरान मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों ने हर वार्ड में दहशत पैâला दी है। हालांकि, गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मामलों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं देखी गई है। इस अवधि में मनपा अस्पतालों और दवाखानों में मरीजों की संख्या बढ़ी, जबकि मनपा की तैयारी और नियंत्रण अभियान अधूरे साबित हुए। शून्य मच्छर प्रजनन और फॉगिंग जैसी घोषणाएं सिर्फ दिखावा रह गर्इं। इससे मुंबईकरों में सरकार के प्रति भारी नाराजगी है।
मनपा प्रशासन के मुताबिक, दोनों महीनों में हजारों की संख्या में लोग बुखार और संक्रमण के खतरे में फंसे रहे। इस बीच बारिश के जमा पानी, पुराने टायर, खुले कंटेनर और स्वच्छता की कमी ने मच्छरों और वायरस को पैâलने के लिए अनुकूल माहौल बना दिया।
जागरूकता अभियान फेल
मनपा ने इन बीमारियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान और नियंत्रण गतिविधियां शुरू की हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी सफलता पर सवालिया निशान लग रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, शहर में ३,२८४ हाउसिंग सोसायटियों और २६४ स्कूलों में जागरूकता सत्र आयोजित किए हैं। साथ ही ५४५ इमारतों को जीरो मच्छर प्रजनन अभियान के तहत शामिल किया है। इसके अलावा ३,६८३ निजी चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए हैं।
सबसे ज्यादा ‘लेप्टो’ की मार
मनपा के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले १५ दिनों में मलेरिया के मामलों में १८ प्रतिशत, डेंगू के मामलों में ४८ प्रतिशत, चिकनगुनिया के मामलों में ४७ प्रतिशत और लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में ४९ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मानसूनी बीमारियों का आंकड़ा
रोग २०२४ २०२५
मलेरिया ४,०२१ ५,७०६
डेंगू १,९७९ २,३१९
चिकनगुनिया २१० ४८५
लेप्टो ५५३ ४७१
गैस्ट्रोएंटेराइटिस ६,१३३ ५,७७४
हेपेटाइटिस ६६२ ८१०
कोविड-१९ १,७७५ १,१११

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