मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य : वीआईपी प्रोटोकॉल

अवधी व्यंग्य : वीआईपी प्रोटोकॉल

एड. राजीव मिश्र
मुंबई
यहि समय आस्था के ज्वार अपने पूरे जोर पे अहइ, जवन मंदिर में देखा, जवन पंडाल में देखा चारिउ ओर मनई के ऊपर मनई गिरि परत हैं। दर्शन पावय बदे बिना खाये-पीये २४ घंटा से लाइन में लगे हैं। यहि भक्तन के अलावा एक भक्तन की टोली अइसन है, जेहिके वीआईपी कहा जात है। ई तरह के वीआईपीन में नेता, मंत्री, अफसर, उनके नात-रिश्तेदार अउर चेला-चपाटी सब आवत हैं। बाकी जनता भेड़-बकरी की तरह धक्का खाय, लाठी खाय, भगदड़ में मारी जाय तो उ ओकर किस्मत। एक दिन नेता, एक व्यापारी अउर एक आम अदमी मरे के बाद चंद्रगुप्त के पास पहुँचे। चंद्रगुप्त के ऑफिस में पहुँचतय नेताजी लपक के एक ठो खाली कुर्सी पे कब्जा कइके बइठ गए। व्यापारी खाली सोफा पे जाइके पसरि गए अउर आम अदमी हाथ जोड़िके खड़ा रहा। थोड़ी देर बाद चंद्रगुप्त अपने चेम्बर से निकलकर अपनी कुर्सी पे बइठय के पहिले तीनउ लोग के देखे और यमदूत से पूछे, कहाँ से उठाई लिहो इनका? महाराज इनका भारत से लेइ आयेन है। इनकी बही-पत्री खोलो, ई जिनगी में का-का कइके आएं हैं? अउर ई हाथ जोड़े कउन कनखजूरा खड़ा है? महाराज, ई आम अदमी है जेकरे वोट से ई नेताजी विधायक अउर जेकरे टैक्स से ई सोफा पे जवन पसरे हैं उ सेठ बनि गए। उ सब ठीक है पर भगवान के चरण कितनी बार छुए है? साहब, चरण तो एक्कउ बार नही छुइ पाए हैं पर दूर से दर्शन किये हैं। चरण छुवय में हाथ में लकवा मारि जात रहा का? चंद्रगुप्त कड़क के पूछे। महाराज हम आम अदमी हैं हम दूर से ही दर्शन पावत हैं, चरण तो ई दूनउ लोग छुवत हैं ऊ भी सरकारी प्रोटोकॉल में। ई दूनउ लोग? ई पूरी उमर मा ३०० से ज्यादा बार भगवान के चरण मा लोटि गए हैं। वाह, ई हैं असली वाले भगत सरग से इनकी खातिर विमान बोलवाओ अउर इन दूनउ लोग के फाइल धर्मराज के ऑफिस में भेजि देव। अउर ई गरीब मनई के का करी? यहिके कड़ाह गरम करो और तेल मा डारी के ओहिमा तब तक इका भूजो जब तक यहि के धुआँ-धुआँ न होइ जाय।

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