हिमांशु राज
फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री की बहुचर्चित फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ 5 सितंबर को रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, अनुपम खेर और दर्शन कुमार जैसे सितारे नजर आएंगे। बड़े नामों के बीच दर्शकों की निगाह एक नए चेहरे पर भी टिकनी तय है—दिल्ली की रहने वाली अनुभा अरोड़ा, जो पत्रकार गौरी की भूमिका निभा रही हैं। दोपहर का सामना के लिए हिमांशु राज से खुल कर कई बिंदुओं पर खुल कर विचार रखते हुए अनुभा बताती हैं कि दिल्ली से ताल्लुक रखने के कारण उन्हें अपने किरदार को समझने में आसानी हुई। फिल्म में गौरी का नजरिया जीवन को सिर्फ सही और गलत के तराजू पर तौलने वाला है।
अपनी अब तक के इस सफर को आसान न मानने वाली अनुभा ने तरुण बजाज कास्टिंग एजेंसी के जरिए उन्होंने कई स्तर के ऑडिशन दिए—सामान्य स्क्रिप्ट से लेकर खास तौर पर गौरी के लिए लिखे दृश्यों तक। ऑफिस में टेस्ट और लुक टेस्ट के बाद आखिरकार उन्हें चुना गया। पत्रकारों से बहुत कुछ सीखने की बात स्वीकारने वाली अनुभा ने अपने रोल की तैयारी के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में सक्रिय पत्रकारों के साथ समय बिताया। उनकी बॉडी लैंग्वेज, सवाल पूछने का तरीका और रिपोर्टिंग के अंदाज को गौर से देखा। इतना ही नहीं, उन्होंने कैमरा पकड़ने और तस्वीरें लेने की बारीकियां भी सीखी ताकि स्क्रीन पर उनका अभिनय बिल्कुल वास्तविक लगे।
विवेक अग्निहोत्री के साथ काम करने का अनुभव उनकी ज़िंदगी की सबसे कीमती यादों में है। वे कहती हैं कि सेट पर गंभीर निर्देशक के अलावा, खाने की मेज़ पर विवेक किसी परिवार के सदस्य जैसे हो जाते थे। दिल्ली के होने की वजह से अक्सर उनसे अपने शहर की बातें होती थीं, जिससे माहौल और भी घरेलू हो जाता था।
फिल्म उद्योग में मौजूद बोल्ड कंटेंट पर उनकी राय साफ है। वे मानती हैं कि अगर कहानी की ज़रूरत हो तो ऐसे दृश्य निभाने में झिझक नहीं है, लेकिन जबरदस्ती प्रभाव जमाने के लिए डाला गया दृश्य उन्हें स्वीकार्य नहीं। उनका कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट से दूर रहना ही बेहतर है।
संघर्ष और मेहनत को लेकर अनुभा दो टूक कहती हैं कि फिल्म इंडस्ट्री आसान जगह नहीं है। यहाँ मेहनत बहुत है और संघर्ष अक्सर हतोत्साहित कर सकता है। खुद को संतुलित और प्रेरित रखने के लिए वे सकारात्मक और सृजनात्मक सोच रखने वाले लोगों से जुड़ना पसंद करती हैं। दिल्ली में अभिनय सीखते समय उन्हें अनुराग सिंह का मार्गदर्शन मिला और असरानी जी के साथ थिएटर व शो करने का अनुभव भी। इन्हीं मंचों ने उनकी समझ और अभिव्यक्ति को पैना किया।
अनुभा मानती हैं कि आज के समय में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को नकारा नहीं जा सकता। इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसी जगहों से पहचान तो मिलती है, लेकिन अंततः मेहनत का कोई विकल्प नहीं। सच्चा कलाकार वही है जो दर्शकों तक अपने किरदार की सच्चाई पहुंचा सके और यही वे अपने सफर का मूल मंत्र मानती हैं।
फ़िल्म देख कर निर्णय करने की पक्षधर,बिना देखे विरोध करने को उचित न मानने वाली अनुभा अरोड़ा ‘द बंगाल फाइल्स’ के साथ दर्शकों के सामने एक ऐसे चेहरे के रूप में उभर रही हैं, जिसने संघर्ष की राह तय की है और अब बड़े पर्दे पर अपने हुनर से नई पहचान बनाने को तैयार है।
