सामना संवाददाता / मुंबई
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आई बाढ़ की स्थिति को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नियोजन के अभाव के कारण आम नागरिकों को इस प्राकृतिक आपदा का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
सोशल नेटवर्विंâग साइट एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में आदित्य ठाकरे ने कहा कि उत्तर हिंदुस्थान के कई राज्य इस समय प्रकृति के प्रकोप का सामना कर रहे हैं। इस संकट में फंसे सभी नागरिकों के प्रति मेरी संवेदना है। लेकिन यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि प्रशासनिक नियोजन की गंभीर खामियों का परिणाम है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी आशा करता हूं कि केंद्र सरकार राज्यों और इन क्षेत्रों की जनता को आवश्यक मदद देगी। यह आपदा अब केवल दशक में एक बार आने वाली घटना नहीं रही। हर राज्य को इस जलवायु संकट का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ों की कटाई, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, नदियों के मार्ग बदलना और कई अन्य कार्रवाइयों का यह सीधा परिणाम है।
लाखों लोग प्रभावित
देश में भारी बारिश और बाढ़ के चलते कई राज्यों में हालात गंभीर हैं। पंजाब, हरियाणा और जम्मू कश्मीर में बाढ़ के कारण स्थिति बेहद खराब है। देश के १०० से ज्यादा जिलों में तूफानी आफत बरस रही है। इसके चलते लाखों लोग प्रभावित हैं। पंजाब में बाढ़ से हालात बेकाबू हैं ६७,००० एकड़ कृषि भूमि नष्ट हो गई है और स्कूलों को ७ सितंबर तक बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन से हालात खराब हैं।
सिर्फ तत्काल बचाव, राहत और मुआवजा पर्याप्त नहीं
आदित्य ठाकरे ने कहा कि हिंदुस्थान जलवायु संकट के दरवाजे पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ तत्काल बचाव, राहत और मुआवजा पर्याप्त नहीं है। हिंदुस्थान और हिंदुस्थानियों के भविष्य के लिए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
