– ग्रामपंचायतों ने किया विरोध
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र की बढ़ती आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित बांधों का विरोध इनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। सरकार कालू बांध के निर्माण के लिए तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों का विरोध कम नहीं हो रहा है। प्रशासन ने १३ साल पहले हुई गलती को सुधारने के लिए ग्राम सभा का आयोजन किया था, लेकिन ग्राम सभाओं ने बांध विरोधी प्रस्ताव पारित किए। इसलिए कालू बांध के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
महाराष्ट्र भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, २०१३ की धारा ४१ के साथ-साथ पेसा अधिनियम और अन्य लागू कानूनों के अनुसार, अनुसूचित जाति के क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण या भूमि हस्तांतरण के लिए संबंधित ग्राम सभाओं की पूर्व अनुमति आवश्यक है। तदनुसार, सरकार ने अगस्त २०२५ में प्रभावित गांवों की ग्राम सभाएं आयोजित की थीं। परंतु इन सभी ग्राम सभाओं ने कालू बांध परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए बांध के लिए किसी भी सरकारी या निजी भूमि का अधिग्रहण करने से सर्वसम्मति से इनकार कर दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार ग्राम सभाओं के इन निर्णयों का आधिकारिक रिकॉर्ड रखे। तलेगांव, चासोल, न्याहाडी, फांगलोशी, खुटल आदि ग्राम सभाओं ने बांध विरोधी प्रस्ताव पास किए हैं।
बल प्रयोग न करें
ग्राम सभाओं ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए परियोजना विरोधी प्रस्ताव पारित किए हैं। इसलिए ग्रामीण सरकार को चेतावनी दे रहे हैं कि वह हमारे ग्राम सभा क्षेत्र में बल प्रयोग न करें। इसके अलावा अवैध रूप से कोई सर्वेक्षण या कोई अन्य भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया न करें। ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने सरकार को चेतावनी भी दी है कि अगर सरकार ने स्थिति की अनदेखी की और बल प्रयोग किया, तो बांध पीड़ितों को आंदोलन और उच्च न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा।
