अमेरिका और इजरायल ने किया विरोध, समर्थन में १४५ देश
सामना संवाददाता/ नई दिल्ली
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएन) में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति अब्बास की वर्चुअल संबोधन का समर्थन किया है। प्रस्ताव के समर्थन में १४५ देशों ने वोट किया, जबकि अमेरिका और इजरायल ने विरोध किया। पारंपरिक रूप से भारत और फिलिस्तीन के संबंध आपसी सहयोग के रहे हैं, लेकिन कुछ वर्षों में भारत की मोदी सरकार का झुकाव अमेरिका और इजरायल की ओर अधिक होने के कारण इस संबंध में इसे आलोचनाओं का शिकार भी होना पड़ा। अब अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जाकर फिलिस्तीन का समर्थन करने के साथ ही मोदी सरकार फिलिस्तीन के प्रति भारत के पारंपरिक रुख पर लौट आई जान पड़ती है। अब्बास अगले सप्ताह वीडियो लिंक के जरिए महासभा को संबोधित करेंगे। इसे फिलिस्तीन के लिए कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।
बता दें कि १९३ सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने ८०वें सत्र के दौरान ‘फिलिस्तीन राज्य की भागीदारी’ शीर्षक से एक प्रस्ताव पारित किया। इनमें १४५ देशों ने पक्ष में, जबकि अमेरिका और इजरायल सहित पांच ने इसके खिलाफ वोट किया। छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
प्रियंका ने याद दिलाया इतिहास!
इस बीच, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भारत और फिलिस्तीन के आपसी संबंधों के इतिहास की याद दिलाई और कहा कि भारत १९८८ में फिलिस्तीन को एक देश के रूप में सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में एक था, जबकि ब्रिटेन सरीखे कई देशों को इसमें कई दशक लगे। लेकिन बड़े दुख की बात है कि पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार ने दोनों देशों के बीच के पारंपरिक संबंधों का ध्यान नहीं रखा। प्रियंका के इस बयान का कांग्रेस नेताओं ने समर्थन किया है।
