उमेश गुप्ता / वाराणसी
देवा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर चाइल्ड केयर ,वाराणसी द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बच्छावं स्थित देवा ग्राम में मानसिक दिव्यांग बच्चों एवं उनके अभिभावकों के लिए दो दिवसीय दिव्य योग का आयोजन किया गया। दूसरे दिन बड़े हो हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रीना मुखर्जी, भूतपूर्व प्रिंसिपल केंद्रीय विद्यालय संगठन एवं विशिष्ट अतिथि दिव्यांग श्री कृष्णा थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, डॉक्टर तुलसी, प्रमुख चिकित्सा मनोवैज्ञानिक एवं मनोचिकित्सक तथा अध्यक्ष देवा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर चाइल्ड केयर एवं सेक्रेटरी श्याम लाल द्वारा किया गया।
दीप प्रज्वलन के उपरांत डॉ. तुलसी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एवं दिव्यांग जनों के लिए पिछले 20 वर्षों के शोध के बाद विकसित किए हुए दिव्ययोग का प्रदर्शन दिव्यांग जनों द्वारा कराते हुए उसकी व्याख्या बताई गई। अपने व्याख्यान के दौरान डॉक्टर तुलसी ने बताया की भारतवर्ष में योग और ध्यान की प्रक्रिया सनातन काल से ऋषियों मुनियों तपस्वियों एवं संतों द्वारा की जा रही थीं. जिसका मुख्य उद्देश्य एक अच्छे मानव का निर्माण. जिसमें सर्वांगीण विकास हो और आत्मा की परमात्मा से मिलन की विधि बताई गई थी l हमारे विभिन्न ग्रंथ जैसे रामायण, महाभारत वेद और पुराणों में भी योग और ध्यान के पराविद्या विधियां का वर्णन है, जिससे न केवल व्यक्ति का भौतिक विकास होता है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी व्यक्ति विकसित होता है। इन महर्षियों ने और संतों ने योग के कई मार्ग बताएं, जिनमें प्रमुख रूप से कर्म योग का सिद्धांत, ध्यान योग, भक्ति योग, नाद योग या स्वर योग, ज्ञान योग और हठयोगी एवं पतंजलि के योग सूत्र आज भी हजारों साल के बाद भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रचलित हो रहे हैं। योग और ध्यान की उपयोगिता की ओर पूरे विश्व का आकर्षण तब बढ़ा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विश्व पटल पर रखा और आज इसी का परिणाम है कि समूचे विश्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जाता है। डॉ. तुलसी ने दिव्य योग के बारे में प्रकाश डालते हुए बताया की दिव्य योग दिव्यांगों के लिए खास कर मानसिक दिव्यांगता से ग्रसित बच्चों एवं वयस्कों के लिए विकसित किया गया योग का एक संपुष्ट है, जिसमें हठ योग, ध्यान योग, नाद योग, कर्म योग एवं हट योग, भक्ति योग के कुछ अंश है, अपितु आहार एवं व्यवहार के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई है। पिछले 15 से बीस वर्षों से A D H D, मंदबुद्धि से ग्रसित बच्चों, ऑटिस्टिक बच्चों को नियमित रूप से देवा केंद्र पर एवं अभिभावकों द्वारा घर पर कराया जा रहा है। लगभग 400 बच्चों में पिछले 15 वर्षों के दौरान का आंकड़ा देते हुए डॉक्टर तुलसी ने बताया कि बिना किसी दवाई के केवल आहार और व्यवहार में परिवर्तन कर, दिव्य योग की ट्रेनिंग दे कर बच्चों में परिवर्तन देखा गया है, बल्कि इस योग से माता-पिता भी अपने बच्चों को सही तरीके से स्वीकार कर चुके हैं और उनमें भी खुशी और उल्लास उत्पन्न हुआ है बच्चों में दिव्य योग के कारण उनकी हाइपर एक्टिविटी में कमी अटेंशन और कंसंट्रेशन में वृद्धि बातचीत में वृद्धि निडर और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। इस अवसर पर कई माता-पिता ने भी अपने वक्तव्य रखें और दिव्य योग की उपयोगिता को स्वीकारा। कार्यक्रम के अंत में श्यामलाल, सेक्रेटरी देवा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर चाइल्ड केयर ने सभी आए हुए मेहमानों व अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापन दिया।
