" /> पिता

पिता

हर मुसीबत के आगे ये पहाड़ से खड़े हैं,
‘पिता’ शब्द भले छोटा है, पर इसके मायने बहुत बड़े हैं।
अपनी हर छोटी-बड़ी जरूरत का त्याग कर दिया,
पर अपने बच्चों के भविष्य के लिए हमेशा खड़े हैं।
हर सुख-दुःख, चिंता-फिक्र दिल में दफन कर लिया,
बच्चों की हर जरूरत पूरा करने की जिद में लगे हैं।
अपना कोई भी काम करने से पहले बच्चों की सोचते हैं,
ये वो वृक्ष है, जिनकी छांव में बच्चे निश्चिंत होकर पड़े हैं।
मां अवनी है तो पिता भी व्योम के समान हैं,
मां नींव है और पिता घर की छत के समान है।
घर की फर्श थोड़ी टूट भी जाए तो क्या हुआ,
पर बिना छत के घर का क्या अभिमान है ?
पिता हैं तो बच्चों का मन, उपवन-उद्यान है
मां भी करती हैं जरूरतें पूरी,
पर पिता हैं तो बच्चों की जरूरत ये पूरा आसमान है।
हर मुसीबत के आगे ये पहाड़ से खड़े है,
पिता शब्द भले छोटा है, पर इसके मायने बहुत बड़े हैं।
-किरन तिवारी, विरार-पश्चिम