सामना संवाददाता / मुंबई
धीरेंद्र शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में दिए गए विवादित बयान के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस मुद्दे पर सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बागेश्वर बाबा को महाराष्ट्र की संत परंपरा से जोड़ते समय फडणवीस को शर्म आनी चाहिए और उनकी बुद्धि पर तरस आता है।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया था कि समर्थ रामदास, शिवाजी महाराज के गुरु थे। इस बयान के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने शास्त्री के इस बयान की कड़ी आलोचना की है। रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में सपकाल ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने शिवाजी महाराज के बारे में आपत्तिजनक बातें कहीं इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने उन्हें ‘संत’ कहा, जो महाराष्ट्र की समृद्ध संत परंपरा का अपमान है। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, गाडगे बाबा और तुकडोजी महाराज जैसे संतों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी महान परंपरा में बागेश्वर बाबा जैसे व्यक्ति को शामिल करना गलत है। सपकाल ने यह भी सवाल उठाया कि जब धीरेंद्र शास्त्री शिवाजी महाराज का कथित अपमान कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री, नितीन गडकरी और मोहन भागवत चुप क्यों थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवाजी महाराज का अपमान करना भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नीति का हिस्सा है। साथ ही उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री, मुख्यमंत्री फडणवीस, नितीन गडकरी और मोहन भागवत से सार्वजनिक माफी की मांग भी की है।
