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‘खरात’ की ठगी का साम्राज्य ढहने की ‘इनसाइड स्टोरी’…अंडरकवर बनकर ‘गैंग’ में दाखिल हुआ था ‘कुक’… ‘कुक’ ने किया था भोंदू का पर्दाफाश!

-‘काजू कतली’ का चमत्कार दिखाकर सीए से ठगे थे ८.७६ करोड़ रुपए

सुनील ओसवाल / मुंबई

हवा में हाथ घुमाकर ‘काजू कतली’ निकालने का दावा और उसी ‘चमत्कार’ के भरोसे करोड़ों की ठगी। नासिक के कथित भोंदू अशोक खरात के खिलाफ सामने आया ताजा मामला यह दिखाता है कि अंधविश्वास और भय के सहारे किस तरह सुनियोजित तरीके से आर्थिक शोषण किया गया। खास बात यह है कि इस बार शिकार बने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने ही पूरे खेल का पर्दाफाश किया।
मुंबई के वर्ली निवासी सीए ललित पोफले वर्ष २०१७ में खरात के संपर्क में आए थे। शुरुआती मुलाकात में खरात द्वारा ‘हवा से काजू कतली निकालने’ जैसे चमत्कार ने उन पर असर डाला। इसके बाद खरात ने बातचीत का रुख बदलते हुए पोफले को उनके माता-पिता के ऊपर ‘मृत्युयोग’ होने का डर दिखाया और उससे बचने के लिए ‘अवतार पूजा’ जैसे अनुष्ठानों की सलाह दी। इसी डर के आधार पर पैसों की मांग शुरू हुई। पोफले की शिकायत के अनुसार, अलग-अलग चरणों में उनसे कुल ८ करोड़ ७६ लाख रुपए लिए गए। इसमें ४ करोड़ २५ लाख रुपए सीधे खरात और उसकी पत्नी के खातों में जमा कराए गए, जबकि २ करोड़ ५३ लाख रुपए त्रिवेंद्रम और वावी स्थित धार्मिक स्थलों पर कथित पूजा के नाम पर खर्च कराए गए। लगातार बढ़ती मांग और कथित खतरे के खत्म न होने से पोफले को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने सीधे टकराव के बजाय उन्होंने जानकारी जुटाने की रणनीति अपनाई। अपने ड्राइवर के जरिए एक व्यक्ति को खरात के फार्महाउस पर कुक के रूप में नियुक्त करवा दिया, जिसने अंदर की गतिविधियों पर नजर रखी।
फार्महाउस के अवैध धंधे होने लगे लीक!
भोंदू बाबा अशोक खरात के पाप का पर्दाफाश एक अंडरकवर कुक ने किया है। इस कुक को एक सीए ने वहां प्लांट किया था। इस सीए के करोड़ों रुपए भोंदू ने ठग लिए थे। इस
कुक के जरिए भोंदू के फार्महाउस पर होने वाली गतिविधियों, संपर्कों और व्यवहार से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत सामने आए। इन जानकारियों के आधार पर सीए पोफले ने अन्य संभावित पीड़ितों के साथ पुलिस से संपर्क किया।
शिर्डी पुलिस के साथ समन्वय कर नासिक के सरकारवाडा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया गया। अशोक खरात खुद को ‘कैप्टन’ और ‘कॉस्मोलॉजी विशेषज्ञ’ बताता रहा है। उसके खिलाफ पहले से ही यौन शोषण, धोखाधड़ी और अंधश्रद्धा फैलाने के आरोप दर्ज हैं। मार्च २०२६ में गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच विशेष जांच दल को सौंपी गई थी। नए मामले के सामने आने से उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस प्रकरण के बाद नासिक जिले में भोंदू बाबाओं के खिलाफ शिकायतों में वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में एक अन्य मामले में भी धार्मिक आस्था के नाम पर शोषण के आरोप सामने आए हैं, जिसमें एक मठ प्रमुख के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

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