-हजारों सरकारी कर्मचारियों ने भी उठाया फायदा…अब खुली सरकार की नींद, ११ करोड़ की हुई रिकवरी
सामना संवाददाता / मुंबई
वेलफेयर के नाम पर चल रही योजनाओं की हकीकत अब सवालों के घेरे में है। ‘लाडली बहन योजना’ में जिस तरह से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है, उसने महायुति सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों जरूरतमंद महिलाओं तक मदद पहुंचाने का दावा करने वाली इस योजना में १६४ करोड़ रुपए की गलत बंदरबांट ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। हैरानी की बात यह है कि हजारों सरकारी कर्मचारियों तक ने नियमों को ताक पर रखकर इस योजना का लाभ उठाया। अब सरकार नींद से जागी है और ११ करोड़ रुपए की वसूली का दावा कर रही है। इसी के साथ ही लाखों लाभार्थियों की दोबारा जांच के पैâसले ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी खामियों और संभावित मिलीभगत का है, जिस पर अब सियासी घमासान तेज हो गया है।
महिला व बाल विकास विभाग ने अब अपात्र लाभार्थियों से वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है और अब तक ११ करोड़ रुपए वापस लिए जा चुके हैं। लेकिन यह कार्रवाई जितनी तेज दिख रही है, उससे कहीं ज्यादा बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि इस योजना के तहत करीब १६४.५२ करोड़ रुपए गलत तरीके से बांटे गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हजारों सरकारी कर्मचारियों ने भी नियमों को दरकिनार कर इस योजना का लाभ उठाया। शुरुआती जांच में २,४०० कर्मचारियों का मामला सामने आया, जबकि सूचना के अधिकार के तहत १२,९१५ सरकारी कर्मचारियों द्वारा हर महीने १,५०० रुपए लेने का खुलासा हुआ। अब ऐसे कर्मचारियों पर वेतन रोकने, पदोन्नति थामने और सेवा रिकॉर्ड में नकारात्मक टिप्पणी जैसी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। कई मामलों में तो सीधे वेतन से वसूली भी शुरू कर दी गई है।
५७ लाख अपात्र
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब ५७ लाख लाभार्थियों पर संदेह जताते हुए उन्हें अपात्र घोषित किया गया है। इससे पहले २६ लाख से ज्यादा खातों को संभावित रूप से संदिग्ध मानते हुए २६.३४ लाख खातों में भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
पैसे लौटाने से इनकार
जांच शुरू होते ही कुछ लाभार्थियों ने पैसे वापस कर दिए तो कुछ ने खुद ही योजना से नाम हटा लिया। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने रकम लौटाने से इनकार किया। इससे सरकार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
