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शिवराय पर बयान से सियासी ज्वालामुखी…सह्याद्रि को मत सिखाओ इतिहास!

– धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भड़का महाराष्ट्र

-अंबादास दानवे-कोल्हे का करारा जवाब

सामना संवाददाता / मुंबई

शिवराय के गौरव और इतिहास पर दिए गए विवादित बयान ने महाराष्ट्र की सियासत में मानो ज्वालामुखी फोड़ दिया है। नागपुर में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी के बाद पूरे राज्य में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सह्याद्री को मत सिखाओ इतिहास के स्वर के साथ राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शिवसेना नेता अंबादास दानवे और राष्ट्रवादी कांग्रेस के अमोल कोल्हे ने सीधे हमला बोलते हुए साफ कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की पहचान, स्वाभिमान और अस्मिता हैं। इस पर किसी बाहरी ‘ज्ञान’ की जरूरत नहीं है। नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अधूरी और भ्रामक जानकारी के आधार पर शिवराय के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री द्वारा दिए गए कुछ बयानों से नया विवाद खड़ा हो गया है। उनके बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। शास्त्री ने हिंदू समुदाय से अपील करते हुए कहा था कि चार बच्चे पैदा करो और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समर्पित करो। इस बयान को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। शिवसेना नेता अंबादास दानवे ने एक्स पर पोस्ट कर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। दानवे ने कहा कि महाराष्ट्र में आकर यहां के लोगों को छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में ‘सिखाने’ का यह कोई नया चलन नहीं है।
‘स्वाभिमान की पहचान’
राष्ट्रवादी सांसद अमोल कोल्हे ने भी शास्त्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। कोल्हे ने कहा कि जब मुगल आक्रमण के सामने उत्तर भारत झुक गया था, तब सह्याद्री की कठोर चट्टानों पर तलवार की धार से इतिहास लिखने वाले महाराष्ट्र को कोई भी व्यक्ति अधूरी और गलत जानकारी के आधार पर शिवाजी महाराज सिखाने की कोशिश न करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज केवल एक पूजनीय व्यक्तित्व नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता, स्वाभिमान और पहचान हैं और यह हमेशा रहेगा।

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