सुनील ओसवाल / नासिक
भोंदू बाबा अशोक खरात के मामले में कल रविवार को नासिक जिला न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान नया मोड़ सामने आया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को न्यायिक हिरासत में खतरा हो सकता है। इस बीच, पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद अदालत ने खरात को १४ दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
खरात को उसके खिलाफ दर्ज छठे मामले में पुलिस हिरासत समाप्त होने पर वीडियो कॉन्प्रâेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने तर्क दिया कि मामले की गंभीरता और संभावित जोखिम को देखते हुए आरोपी की सुरक्षा एक मुद्दा है। साथ ही, आगे की जांच के लिए उसे विशेष जांच दल (एसआईटी) के हवाले किए जाने की आवश्यकता भी जताई गई। अदालत में यह भी बताया गया कि जांच एजेंसियों ने अन्य संदिग्धों को कब्जे में लेने और पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की है। इसी आधार पर खरात को आगे की जांच के लिए एसआईटी के ताबे में देने का आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इससे संकेत मिले हैं कि आरोपी को एक बार फिर जांच एजेंसी की हिरासत में लिया जा सकता है।
सरकारी अधिवक्ता किरण बेंडभर ने बताया कि आरोपी दो दिन की पुलिस हिरासत में था और उसके खिलाफ अन्य मामलों की जांच भी जारी है। उन्होंने कहा कि संबंधित प्रावधानों के तहत पुलिस कस्टडी का अधिकार सुरक्षित रखा गया है और आरोपी को महिला अत्याचार से जुड़े मामले में वर्गीकृत कर आगे पुलिस हिरासत के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।
खरात के खिलाफ पहले से ही ठगी, अंधविश्वास पैâलाने और अन्य गंभीर आरोपों के कई मामले दर्ज हैं। अब न्यायिक हिरासत के दौरान सुरक्षा के मुद्दे के उठने से यह मामला और संवेदनशील हो गया है।
