पीएम के काफिले की तस्वीरों ने ही खोल दी ‘गुजरात मॉडल’ की सारी पोलपट्टी!
नरेंद्र मोदी के राज में गुजरात का विकास होने की पोलपट्टी अब पूरी तरह से खुलकर सामने आने लगी है। इवेंट मैनेजमेंट में माहिर मोदी ने पिछले कुछ सालों में राज्य सहित पूरे देश में ‘विकसित गुजरात’ का एक फर्जी हौवा खड़ा कर रखा था। लेकिन पिछले दिनों खुद मोदी के ही काफिले की तस्वीरों ने उनके इन हवा-हवाई विकास वाले जुमलों की सारी हवा ही निकाल दी है।
पिछले तीस सालों से गुजरात में भाजपा सत्ता पर काबिज है, जबकि अकेले मोदी २००१ से २०१४ तक वहां सीएम रहे। उसके बाद वह पीएम बन गए। इस दौरान जुमले उछालने में माहिर व प्रचार के लिए लालायित माने जाने वाले मोदी ने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ और ‘वर्ल्ड क्लास सड़कों’ के साथ ही ‘विकसित गुुजरात’ जैसे कई जुमले मीडिया में उछाले। मीडिया भी उनके झांसे में आ गया या माना जाता है कि उसे खरीद लिया गया।
मीडिया में इसी तरह की खबरें उड़ाई जाने लगीं। इसके बाद देश में ‘विकसित गुजरात’ की ‘वर्ल्ड क्लास’ सड़कों से लेकर ‘वाइब्रेंट गुजरात‘ और ‘विकास का गुजरात मॉडल’ तक की चर्चाएं कराई जाने लगीं।
लेकिन २०२० में मोदी ने जब अपने कथित मित्र डोनाल्ड ट्रंप के ‘स्वागत’ में हवाई अड्डे से कार्यक्रम स्थल तक जाने वाली सड़क के किनारे की झोंपड़ियों को दीवार बनाकर ढंकने की बड़ी और बहुत ही भद्दी सी कोशिश की तो पहली बार लोगों को लगा कि अगर मोदी ने इतना ही विकास कर दिया है गुजरात का तो दीवार बनाकर अपने की देश की जनता की गरीबी का मजाक बनाने की नौबत ही क्यों आई ‘विकसित’ और ‘वाइब्रेंट’ गुजरात में! इससे न सिर्फ राज्य की गरीब जनता का अपमान हुआ, बल्कि पहली बार लोगों को लगा कि गुजरात मॉडल के कथित विकास के पीछे कोई सच्चाई नहीं है, वर्ना मोदी को अपने कथित मित्र के लिए अपने ही देश की गरीब जनता का मजाक उड़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
बात यहीं तक नहीं रुकी। पिछले दिनों बारिश के पानी से राज्य के कई बड़े शहरों की सड़कों के नदी नालों में तब्दील होने, उनमें तैरने व नहाने तथा नावें तक चलाये जाने की तस्वीरें वायरल होने लगीं। पिछले दिनों रही सही कसर खुद पीएम मादी के काफिले की वायरल तस्वीरों ने कर दी। इसमें राज्य की बेहद खस्ताहाल व गड्ढों से भरी वर्ल्ड क्लस सड़कों से मोदी के काफिले को गुजरते हुए देखा जा सकता है। गुजरात की बदहाल सड़कों से गुजर रहे पीएम के इस काफिले ने कथित विकास मॉडल की सारी पोलपट्टी खोल दी है।
विपक्ष ने चेताया था, पर…
ऐसा भी नहीं है कि इस दौरान प्रमुख विपक्षी दलों के साथ ही कई गैर-गोदी पत्रकारों ने साक्ष्यों के साथ लगातार लोगों को मोदी के झूठे दावों के प्रति आगाह करने की कोशिश की लेकिन इवेंट और मीडिया मैनेजमेंट के मार्फत मोदी लगातार अपना झूठा एजेंडा चलाने में कामयाब रहे। यही कारण रहा कि कई लोग उनके विकसित गुजरात संबंधी पैâलाई गई ‘अफवाहों’ या जुमलों पर यकीन कर बैठे। लेकिन कहते हैं न कि झूठ के पैर नहीं होते, वही इस मामले में भी हुआ।
