प्रभुनाथ शुक्ल, भदोही
बिहार में फिर चुनाव के बयार बहे लागल बा। हर गली-मोहल्ला में पोस्टर के मेला, घोषणा के धंधा, आ नेता लोग के मन उ तो ऐसे फुफकारता जइसे काला कोबरा! अब देखीं ना कुछ नेता लोग कह रहल बा कि हमरा के टिकट ना मिलल त हम दल बदल दीब, जइसे टिकट ना भइल त पासपोर्ट बन गईल बा। बिहार के राजनीति में अब निष्ठा के मोल कौड़ी भर ना रह गइल बा। काल्ह तक जवन नेता कहत रहे हमरे दल से बढ़ के कवनो ना, आज उ कहता दल से बढ़ के हमरा परिवार बा, अउर परिवार में सब दल आपन!
एक नेता तो कह देले हम दल बदल ना कइनी, बस प्लेटफॉर्म बदल देनी, ट्रेन वही बा, सफर वही बा।
अब ओनका देखीं दिन में एनडीए के मीटिंग, रात में महागठबंधन के सपना। उहे मास्टर स्ट्रोक के खेला जहाँ हवा तेज उहें पताका फहरी। एक युवा नेता हउवें हर दिन घोषणा पत्र में नयका सपना, हर घर नौकरी, बाकि ई ना बतावत बानी कि सरकारी नौकरी कि राजनीति वाली? फिल्मी हीरो त पूरा डिमांड मोड में बानी कहत बानी ४० सीट चाहीं, जइसे शादी में मिठाई के प्लेट गिनात होखीं।
बिहार में एगो अउर नेता प्रगट हो गईली, ऊ रणनीति बनावत बनावत अब खुदे नेता बन गइल बानी। कहत बाड़े हम सिस्टम बदलीं। बिहार के जनता अब अइसन हो गइल बानी कि कहता नेता लोग के देख के हंसी आवे लागल बा। हर पाँच बरिस पर ऊ लोग नया नारा, नया वादा आ पुरान गुस्सा ले के आवेला। दल बदल अइसन तेज बा जइसे मेला में झूला घूमे।
एके दल में रहेवाला नेता के अब खुदे याद ना रहे कि ऊ कवन दल में बानी आज?
ए चुनाव में नेता लोग एक-दूसरा के खिलाफ नइखे लड़ रहल, उ आपन पुरान बयान से लड़ रहल बा। जनता सोच रहल बा काहे ना एक ठो नया पार्टी बन जाव ‘दल बदल मोर्चा’? जेकर नारा होखे, जहाँ मन करे, उहें चल दीं! बाकी, जनता के डंक से अब बचे मुश्किल बा नेता जी… ई बार वोटर चुप बा, बाकि जब बोले, तब पूरा दल बदल के नक्शा ही बदल दी।
