मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : सकल हिंदू समाज... आंखें खोलो, मंदिर लुट गया!

संपादकीय : सकल हिंदू समाज… आंखें खोलो, मंदिर लुट गया!

महाराष्ट्र में सकल हिंदू समाज के नाम पर आए दिन तरह-तरह के आंदोलन और तमाशे चलते रहते हैं। हिंदुओं के नाम पर जरा कहीं कुछ खटका हुआ नहीं कि यह ‘सकल हिंदू समाज’ हिंदुत्व के अपमान का ढिंढोरा पीटते हुए सड़कों पर उतर आता है। लेकिन अयोध्या के राम मंदिर के दान, दानपात्र और चांदी के सामानों की सरेआम ‘लूट’ होने के बाद भी यह ‘सकल हिंदू समाज’ दुम दबाकर खामोश बैठा है। अयोध्या का राम मंदिर हिंदू डकैतों ने ही लूटा है, इसीलिए शायद इस सकल हिंदू समाज ने अपनी आंखें और मुंह खुद ही बंद कर लिए हैं। महाराष्ट्र और पूरे भारत में कई जगहों पर ‘सकल हिंदू समाज’ नाम के संगठन ने सड़कों पर उतरकर खूब हंगामा काटा है। इस संगठन का कोई एक तय नेता नहीं है। सकल हिंदू समाज को एक मंच पर, एक छतरी के नीचे लाने के लिए ये लोग सभाएं, सम्मेलन और मोर्चे निकालते रहते हैं। ‘लव जिहाद’, ‘धर्मांतरण’ और ‘गोहत्या विरोधी आंदोलन’ इनके पसंदीदा और मुफीद विषय हैं। यानी सीधे शब्दों में कहें तो किसी मंदिर या मस्जिद का विवाद खड़ा करो, वहां ये ‘सकल’ वाले पहुंचेंगे और तनाव पैदा करेंगे। यही इन ‘सकल’ वालों का शगल बन चुका है। लेकिन क्या हिंदू समाज सिर्फ इन्हीं वजहों से खतरे में आता है? महाराष्ट्र अब ‘नीट पेपर लीक’ का मुख्य अड्डा बन चुका है। इस मामले में महाराष्ट्र से करीब आठ-दस लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पी. वी. कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे, तेजस शाह, मनीषा हवलदार, शिवराज लोखंडे, शुभम खैरनार और कोचिंग क्लास वाले शिवराज मोटेगांवकर जैसे जो लोग पकड़े गए, वे सब कट्टर हिंदुत्ववादी और
भाजपा से जुड़े
लोग हैं। इन सबकी करतूतों की वजह से तमाम हिंदुओं के मासूम बच्चों की जिंदगी तबाह हो गई, कईयों ने तो खुदकुशी तक कर ली। मगर इस मामले में हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए सकल हिंदू समाज का कोई भी बंदा सड़क पर उतरा हुआ नहीं दिखा। पश्चिम बंगाल में भाजपा का रुख देखिए, वहां गोकशी की इजाजत तक दे दी गई। वहां के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि अगर गाय १४ साल की हो, तो उसे शौक से काटो। मतलब क्या १४ साल के बाद गौमाता, गौमाता नहीं रहती? इस गोहत्या के खिलाफ सकल हिंदू नेताओं ने पश्चिम बंगाल में कोई मोर्चा या आंदोलन नहीं निकाला। उधर मध्य प्रदेश के हिंदू मुख्यमंत्री ने हिंदुओं के ही तीर्थस्थल उज्जैन में भगवान महाकाल को सरेआम लुटवा दिया। हिंदुओं की आस्था पर चोट होने के बाद भी ‘महाकाल बचाने’ के लिए फडणवीस मंत्रिमंडल के ‘टिल्लू’ और ‘सकल हिंदू’ नेता अभी तक अपनी जुबान खोलते हुए दिखाई नहीं दिए हैं। अयोध्या के राम मंदिर की लूट तो सकल हिंदू समाज के आंदोलनकारियों के मुंह पर एक खुला चैलेंज है। राम मंदिर की इस खुली लूट के खिलाफ महाराष्ट्र के तमाम ढोंगी ‘सकल हिंदू’ नेता हाथ मलते हुए और मुंह में जुबान दबाकर दुबके बैठे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट में हिंदुत्व के हत्यारे और श्रीराम के दुश्मन बैठे हुए हैं। चोरी की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी। उसकी रिपोर्ट के बाद आठ लोगों पर केस भी दर्ज हुआ, लेकिन मुख्य संदेहास्पद चंपत राय और किसी भी बड़े ट्रस्टी से एक सवाल तक नहीं पूछा गया। (अब सुना है कि इन लोगों ने नैतिकता का ढोंग रचते हुए इस्तीफा दे दिया है, पर यह महज एक रंगबाजी और लीपापोती है।) यानी सरकार ने सीधे तौर पर
मुख्य चोरों की मंडली
को बचा लिया। अयोध्या में मंदिर और भाजपा से जुड़े लोगों ने पहले कौड़ियों के दाम जमीनें खरीदीं और बाद में राम मंदिर ट्रस्ट से सांठगांठ करके वही जमीनें कई गुना महंगे दामों में उसी ट्रस्ट को बेच दीं। इस पूरे घोटाले के सारे सबूत ‘आप’ के सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को सौंपे थे, लेकिन कोई ठोस जांच नहीं हुई। राम मंदिर भारतीय जनता की आत्मा है। इसी राम मंदिर ने हिंदुत्व को जगाया था। इसी राम मंदिर के लिए गुजरात में ‘साबरमती’ को सुलगता छोड़कर गोधरा कांड करवाया गया, जिससे नरेंद्र मोदी का सियासी उदय हुआ। आज भी उसी राम के नाम की रोटियां सेंकी जा रही हैं। इसलिए राम मंदिर की यह लूट सकल हिंदू समाज के आंदोलन का मुख्य मुद्दा होनी चाहिए थी। पर ऐसा क्यों नहीं हुआ? क्या इस चोरी और डकैती में कोई मुसलमान शामिल नहीं है, इसीलिए सकल हिंदू समाज की गैरत नहीं जाग रही? यह एक बड़ा सवाल है। इस चोरी के मामले में यूपी सरकार ने टीनू यादव और अनुकल्प मिश्रा जैसे कुछ छुटकू लोगों को गिरफ्तार किया है। अब किसी को सामने आकर यह अफवाह फैला देनी चाहिए कि ये टीनू, मिश्रा वगैरह हिंदू नहीं, बल्कि मुसलमान हैं, जिन्होंने हिंदुओं का फर्जी नाम रखकर मंदिरों को लूटा है, ताकि ‘राम मंदिर बचाओ’ की जंग को कोई हवा मिल सके। क्योंकि जब तक राम मंदिर की लूट में किसी मुसलमान का नाम सामने नहीं आएगा, तब तक फडणवीस, मिंधे (शिंदे), मोदी, शाह और उनके द्वारा खड़ा किया गया ‘सकल हिंदू समाज’ हिंदुत्व की बुलंद आवाज नहीं उठाएगा। फिलहाल, पूरा सकल हिंदू समाज कुंभकर्ण की तरह गहरी नींद में सोया हुआ है और बेचारे भगवान राम सपरिवार बेहद बेचैन होकर एक बार फिर वनवास काट रहे हैं!

अन्य समाचार