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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का ‘धुआं’… ‘कूपर’ का कमजोर हो चुका है फायर सिस्टम!

-मरीजों की जान से जारी है खिलवाड़

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का ‘धुआं’ एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है। मनपा द्वारा संचालित जुहू स्थित कूपर अस्पताल का फायर सिस्टम कमजोर साबित हो रहा है, जिससे मरीजों की जान के साथ खुला खिलवाड़ जारी है। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने के बाद आखिरकार मनपा की नींद टूटी है और अब वह आग से सुरक्षा बढ़ाने के लिए अस्पताल में फायर सिक्यूरिटी बॉल लगाने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि किसी भी आकस्मिक हादसे की स्थिति में आग पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।
जुहू-विलेपार्ले क्षेत्र में स्थित कूपर अस्पताल पश्चिमी उपनगर के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह अस्पताल अंधेरी, सांताक्रुज, खार, बांद्रा, जोगेश्वरी और मालाड जैसे घनी आबादीवाले इलाकों से आनेवाले रोजाना करीब दो हजार मरीजों को इलाज उपलब्ध कराता है। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के साथ-साथ वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के निकट होने के कारण यहां आए दिन दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों से जुड़े मरीजों का बड़ा बोझ रहता है, ऐसे में अग्नि सुरक्षा का मजबूत होना बेहद आवश्यक है, लेकिन फायर सिक्युरिटी बॉल की तुलना में पहले से लगा पुराना फायर सिस्टम उतना कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। इसलिए मनपा ने फायर सिक्योरिटी बॉल लगाने के लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य उन क्षेत्रों में तत्काल अग्नि प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है, जहां २४ घंटे कर्मचारी मौजूद नहीं रहते। बताया जा रहा है कि ये फायर सिक्योरिटी बॉल तापमान बढ़ते ही अपने आप फट जाती हैं और एक विशेष रासायनिक पाउडर छोड़ती हैं, जो आग को पैâलने से पहले ही नियंत्रित कर देता है। दिवाली के दौरान मुंबई में हुई लगातार आग की घटनाओं और उसमें हुए जन-धन के नुकसान के बाद मनपा ने यह कदम उठाया है, ताकि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा की चूक दोबारा न हो।
मनपा की अन्य इमारतों में प्रणाली प्रभावी
मनपा अधिकारियों ने बताया कि मनपा मुख्यालय में ऐसी अग्नि सुरक्षा गेंदें पहले ही लगाई जा चुकी हैं। तत्कालीन मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रभात राहंगडाले के कार्यकाल में शुरू की गई यह प्रणाली एक प्रभावी निवारक उपाय साबित हुई है।
सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपकरण
कूपर अस्पताल में रोजाना आनेवाले सैकड़ों मरीजों को देखते हुए अधिकारियों का कहना है कि ये उपकरण एक महत्वपूर्ण प्रथम-प्रतिक्रिया उपकरण के रूप में काम करेंगे। आग लगने की स्थिति में ये गोले अपने आप फट जाएंगे या इन्हें हाथ से आग की ओर फेंका जा सकता है, जिससे एक महीन पाउडर निकलता है जो आग को तुरंत बुझा देता है।
व्यापक अग्नि निवारण तैयारी का आग्रह
मनपा ने यह भी दोहराया है कि सभी आवासीय और वाणिज्यिक इमारतों, कार्यालयों, मॉल, कारखानों और दुकानों में आग पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित करने और जान-माल की हानि से बचने के लिए प्रमाणित अग्नि निवारण प्रणालियां स्थापित की जानी चाहिए।

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