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जलवायु परिवर्तन की ‘न्यू नॉर्मल’ नई संकट का सामना करने के लिए कृषि मूल्य आयोग सक्रिय

-“न्यू नॉर्मल” जलवायु स्थिति का फसल उत्पादन लागत पर प्रभाव…विशेष बैठक आयोजित

सामना संवाददाता / मुंबई

“जलवायु परिवर्तन के कारण इस वर्ष कृषि और मानव जीवन को अभूतपूर्व क्षति हुई है। मुआवजा देने के बावजूद यह क्षति पूरी नहीं हो सकती, लेकिन वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों ने इस वर्ष की स्थिति को भविष्य में भी ‘न्यू नॉर्मल’ के रूप में बनी रहने वाली कठिन स्थिति बताया है। इस विकट स्थिति का सामना करने के लिए अब राज्य कृषि मूल्य आयोग सक्रिय हो गया है।” पिछले दशक से जलवायु परिवर्तन की समस्या पर कार्य कर रहे राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री पर्यावरण संतुलित विकास टास्क फोर्स के कार्यकारी अध्यक्ष पाशा पटेल ने “न्यू नॉर्मल” जलवायु स्थिति का फसल उत्पादन लागत पर प्रभाव को गंभीरता से लिया है।
इस प्रतिकूल जलवायु स्थिति की पृष्ठभूमि में, “न्यू नॉर्मल” वैज्ञानिक एवं नीतिगत अवधारणा को कृषि उत्पादों की फसल उत्पादन लागत निकालते समय विचार में लेने के लिए राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल की अध्यक्षता में 1 नवंबर 2025 को सुबह 11 बजे वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी में विशेष बैठक आयोजित की गई है।
महाराष्ट्र राज्य में इस वर्ष IMD पुणे (2024) रिपोर्ट के अनुसार सामान्य से लगभग 23% अधिक वर्षा हुई है तथा कुल 123% LPA वर्षा दर्ज की गई है। राज्य में औसत से अधिक वर्षा हुई olmasına के बावजूद भौगोलिक वितरण अत्यंत असमान रहा। 21 जिलों में अतिवृष्टि हुई जबकि हिंगोली एवं यवतमाळ इन 2 जिलों में तीव्र सूखा अनुभव किया गया। इससे “एक साथ बाढ़ और सूखा” की स्थिति उत्पन्न हुई।
IMD पुणे (2024) एवं IPCC (2023) के अवलोकनों के अनुसार यह स्थिति केवल अपवादात्मक घटना नहीं है बल्कि “न्यू नॉर्मल” के रूप में विकसित हो रही है। इसका कृषि पर सीधा प्रभाव पड़ा है तथा दोबारा बुवाई, सिंचाई, अतिरिक्त निवेश, मजदूरी लागत में भारी वृद्धि हुई है।
इस पृष्ठभूमि में, “न्यू नॉर्मल” अवधारणा को फसल उत्पादन लागत निकालते समय विचार में लेने के लिए 1 नवंबर 2025 को सुबह 11 बजे वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विश्वविद्यालय, परभणी में विशेष बैठक आयोजित की जा रही है, ऐसा पाशा पटेल ने बताया।
बैठक में वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु तथा कृषि अर्थशास्त्र विभाग के विभाग प्रमुख को आमंत्रित किया गया है। बैठक का आयोजन कृषि अर्थशास्त्र विभाग के विभाग प्रमुख के माध्यम से किया जाएगा। उक्त बैठक में राज्य कृषि मूल्य आयोग के सह निदेशक स्वयं उपस्थित रहेंगे।
कभी सूखे के क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला मराठवाडा क्षेत्र इस वर्ष अति वर्षा से तबाह हो गया है। कुल मिलाकर मराठवाडा की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति इससे बदल गई है। “न्यू नॉर्मल” अवधारणा मराठवाडा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है इसलिए पहली बैठक का स्थान वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विश्वविद्यालय निर्धारित किया गया है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. इंद्र मणी ने पाशा पटेल के आह्वान का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री स्तर पर इस गंभीर समस्या पर बैठक आयोजित करने की सहमति दी। जलवायु परिवर्तन की न्यू नॉर्मल स्थिति का अध्ययन कर फसल उत्पादन लागत एवं क्षति मुआवजे के संदर्भ में राज्य एवं देश में इस प्रकार की बैठक पहली बार हो रही है, ऐसा कृषि अध्ययनकर्ताओं में चर्चा है।
यह बैठक किसानों के हित एवं नीति निर्माण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है तथा कृषि क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना करने के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी, ऐसा पाशा पटेल ने अंत में स्पष्ट किया।

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