– अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका नेचर सस्टेनेबिलिटी का सनसनीखेज खुलासा
– दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरु के हालात भी हैं खराब
-भूजल का दोहन है प्रमुख कारण, सिकुड़ रही है ऊपरी परत
सामना संवाददाता / मुंबई
अगर कोई आपको कहे कि मुंबई महानगर नीचे की ओर धंस रहा है तो आप कहेंगे, बकवास। मगर यह सच है। यह शहर हर साल २६.१ मिमी नीचे की ओर धंस रहा है। यह सनसनीखेज खुलासा अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका नेचर सस्टेनेबिलिटी ने किया है। हालांकि, रिपोर्ट में मुंबई के अलावा अन्य शहरों का भी जिक्र है। इसमें दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बंगलुरु जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं। इन शहरों की लगभग ८७८ वर्ग किलोमीटर जमीन लगातार धंस रही है।
उपग्रह से मिला आंकड़ा
यूरोपीय उपग्रह सेंटिनल १ से २०१५ से २०२३ के बीच प्राप्त आंकड़ों से यह निष्कर्ष निकाला गया है। इस अध्ययन के अनुसार, शहर के कई हिस्से इतनी तेजी से धंस रहे हैं कि इमारतें, सड़कें और जलमार्ग गंभीर खतरे में हैं।
हर साल झुक रही हैं महानगरों की इमारतें!
दुनिया के प्रमुख शहर नीचे धंस रहे हैं। यह चौंकाने वाली रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका नेचर सस्टेनेबिलिटी से सामने आई है। प्रोप्रâेसर योगेश दुधपचारे ने भी इसकी पुष्टि की है। दिल्ली में जमीन में सबसे ज्यादा हलचल देखी गई है। दिल्ली में जमीन हर साल ५१ मिमी तक धंस रही है। इसके बाद चेन्नई में ३१.७ मिमी, मुंबई में २६.१ मिमी, कोलकाता में १६.४ मिमी और बंगलुरु में ६.७ मिमी तक जमीन धंस रही है। इन शहरों में लगभग १९ लाख लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां जमीन हर साल ४ मिमी से ज्यादा की दर से धंस रही है। यह प्रक्रिया आंखों से दिखाई नहीं देती, लेकिन इमारतों की नींव झुक जाती है या उसमें दरारें पड़ जाती हैं।
भूजल का असीमित दोहन जमीन धंसने का मुख्य कारण है। जब जमीन से पानी तेजी से निकाला जाता है तो ऊपरी मिट्टी की परतों में सूखापन आ जाता है। ये परतें धीरे-धीरे सिकुड़ती जाती हैं। उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, २००२ से २०२३ के बीच सभी महानगरीय क्षेत्रों में भूजल भंडार में उल्लेखनीय कमी आई है। शहरों पर बढ़ता दबाव, अस्थिर जल प्रबंधन, अनियमित वर्षा चक्र और जमीन के विशाल क्षेत्रों का कंक्रीटीकरण इस संकट को और बढ़ा रहे हैं। जिसके कारण करोड़ों नागरिकों की जान खतरे में होने की बात भी कही जा रही है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता सबसे तेजी से डूब रही है। पिछले २५ सालों में जकार्ता लगभग १६ फीट डूब चुका है। अगर इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो २०५० तक जकार्ता के कुछ हिस्से पूरी तरह डूब जाएंगे। जकार्ता के साथ-साथ न्यूयॉर्क, मेक्सिको सिटी और बांग्लादेश की राजधानी ढाका भी डूबने की कगार पर हैं।
प्रकृति की चेतावनी
इंसानों को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रहने की जरूरत है। मुंबई समेत महत्वपूर्ण शहरों पर मंडरा रहे संकट के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। अगर हम प्रकृति की इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेंगे और तुरंत कदम नहीं उठाएंगे तो भविष्य में मुंबई को डूबने से कोई नहीं बचा सकता।
