‘फूल और कांटे’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली और `रोजा’ से देशभर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मधु शाह आज भी अपनी दमदार अदाकारी के लिए जानी जाती हैं। हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में अपनी अलग छाप छोड़ चुकी मधु ने हाल ही में फिल्म `गवर्नर’ से एक बार फिर दर्शकों का ध्यान खींचा है। चार दशक लंबे करियर, सफल पारिवारिक जीवन और बदलते सिनेमा पर उनके अनुभव बेहद दिलचस्प हैं। इस खास बातचीत में मधु शाह ने अपने फिल्मी सफर, सुपरहिट फिल्मों, परिवार, करियर के उतार-चढ़ाव और आज के सिनेमा पर खुलकर बात की। पेश हैं, मधु शाह से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
-आप पद्मा से मधु कैसे बनीं?
मधु शाह ने बताया कि उनका असली नाम पद्मा रघुनाथ मालिनी था, लेकिन बचपन में पड़ोस की एक महिला उन्हें प्यार से `मधु’ कहने लगीं और यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया। चेन्नई में जन्मी मधु ने १३ साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया, जिसके बाद उनके पिता ने अकेले ही उनका और उनके भाई का पालन-पोषण किया। हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती ने उनकी तस्वीरें निर्देशक मणिरत्नम को भेजीं, जिससे उन्हें `रोजा’ मिली। वहीं वीरू देवगन और कुकू कोहली ने उन्हें `फूल और कांटे’ के लिए चुना। मधु कहती हैं कि उन्होंने कभी स्टार बनने की महत्वाकांक्षा नहीं रखी, लेकिन मेहनत और किस्मत ने उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
`रोजा’ की शूटिंग और अरविंद स्वामी के साथ काम करने का आपका अनुभव वैâसा रहा?
मधु शाह ने बताया कि `रोजा’ से पहले अरविंद स्वामी ने दक्षिण भारतीय फिल्म `थलपति’ में काम किया था, लेकिन `रोजा’ ने उन्हें पूरे देश में स्टार बना दिया। `रोजा’ की शूटिंग को याद करते हुए मधु ने बताया कि एक दृश्य में अरविंद स्वामी को उनकी मासूमियत से प्रभावित होना था, लेकिन यह सीन करीब २५ रीटेक के बाद भी आसानी से ओके नहीं हो पाया। मधु के मुताबिक, वह उस समय बेहद घबराई हुई थीं।
-नाना पाटेकर से आपने अभिनय का सबसे बड़ा सबक क्या सीखा?
मधु शाह ने बताया कि फिल्म `करातम् भुगतम’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उन्हें स्वाभाविक अभिनय का महत्व सिखाया। एक भावुक दृश्य में जब वह ग्लिसरीन लगाने वाली थीं, तब नाना ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी और कहा कि असली दर्द महसूस करो, तभी सच्चे आंसू आएंगे।
-शादी के बाद आपने अभिनय से दूरी बनाने का फैसला क्यों किया?
मधु शाह ने बताया कि उनके लिए फिल्में सिर्फ करियर नहीं, बल्कि जुनून और कला का माध्यम थीं। अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम करने के बाद उन्हें लगा कि अब परिवार और मातृत्व को समय देना चाहिए, इसलिए उन्होंने शादी का पैâसला किया।
-फिल्म `गवर्नर’ में मनोज बाजपेयी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मधु शाह ने बताया कि `गवर्नर’ में पहली बार मनोज बाजपेयी के साथ काम करना उनके लिए बेहद यादगार अनुभव रहा। उन्होंने मनोज को एक समर्पित और प्रतिभाशाली अभिनेता बताते हुए कहा कि वह अपने हर किरदार को पूरी ईमानदारी से जीते हैं। फिल्म में मनोज का किरदार तमिल भाषी है, इसलिए उन्होंने मधु से संवादों में सही तमिल लहजा और शब्दों की बारीकियां समझाने में मदद मांगी। मधु ने उन्हें कई तमिल शब्दों और उनके सही उच्चारण का अभ्यास कराया, जिसे मनोज ने बड़ी लगन से सीखा और अभिनय में खूबसूरती से शामिल किया।
