नमन योग्य वे भारतीय,
जिन्हें देकर झूठी तसल्ली,
दिखाकर सब्ज बाग अच्छे जीवन के,
बंधुआ मज़दूर बनाकर मॉरीशस लाया गया।
आजीवन धूर्त अंग्रेजों के दुराचार सहे।
धन्य हैं वही भारतीय,
जो श्रीरामचरितमानस को
अपने जीवन का पतवार बना पाए।
श्रीहनुमान चालीसा जी
पढ़कर हिम्मत जुटा पाए।
आज उनकी पांचवीं पीढ़ी मॉरीशस की
सम्मानित नागरिक कहलाती है।
नमन उन पूर्वजों को, जो
आज भी घर में मातृभाषा
भोजपुरी बोलते हैं।
-बेला विरदी
