राजन पारकर / मुंबई
महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग से जुड़े ४९ करोड़ ३१ लाख रुपए के कथित राजस्व नुकसान के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पूर्व मुद्रांक जिलाधिकारी एवं म्हाडा की सह-मुख्य अधिकारी वंदना सूर्यवंशी के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों के बीच सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई के बावजूद कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, कथित आर्थिक नुकसान की प्राथमिक जांच शुरू होने के बाद सरकार ने उन्हें म्हाडा से तत्काल कार्यमुक्त कर मंत्रालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। इतना ही नहीं, आदेश की अवहेलना करने पर उन्हें ‘डाइस नॉन’ घोषित करते हुए विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि संबंधित अधिकारी अब तक अपने नए पदस्थापन स्थल पर समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाई हैं।
‘वरिष्ठ आईएएस दंपति’ के संरक्षण की चर्चा
अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का साहस उन्हें किसके संरक्षण में मिला? मंत्रालय के गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि संबंधित अधिकारी को मंत्रालय में कार्यरत एक वरिष्ठ आईएएस दंपति का अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है।
राजस्व विभाग से जुड़े घोटाले ने खड़े किए कई सवाल
राजस्व विभाग से जुड़े ४९ करोड़ ३१ लाख रुपए के कथित राजस्व नुकसान के मामले में हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि इन चर्चाओं में तथ्य हैं तो निष्पक्ष जांच के लिए इस पहलू की भी जांच आवश्यक मानी जा रही है।
एमएमआरडीए का कार्यकाल भी विवादों में
सूत्रों के अनुसार, वंदना सूर्यवंशी के एमएमआरडीए में कार्यरत रहने के दौरान भी एक गंभीर आपराधिक प्रकरण सामने आया था। बताया जाता है कि उनके विरुद्ध विनोबा भावे पुलिस स्टेशन में सदोष मनुष्यवध से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। उस मामले की वर्तमान स्थिति क्या है, जांच किस स्तर पर है और उसका अंतिम परिणाम क्या रहा, इसे लेकर भी सरकार से स्पष्ट जानकारी की मांग उठ रही है।
म्हाडा में नोटिसों का खेल या वसूली का तंत्र?
डिजिटल होर्डिंग प्रकरण में यह आरोप भी सामने आए हैं कि तकनीकी विभाग को दरकिनार कर निर्णय लेने की प्रक्रिया बदली गई और बड़ी संख्या में होर्डिंग संचालकों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत सुनवाई के नाम पर दबाव बनाया गया। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
बदली के बाद भी कार्यालय में आवाजाही पर सवाल
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कार्यमुक्ति आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित अधिकारी के म्हाडा कार्यालय आने-जाने की चर्चाएं हैं। यदि ऐसा हुआ है तो सरकारी फाइलों, रिकॉर्ड और संभावित साक्ष्यों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
