-हर दिन खतरे से गुजर रहे हैं ८० लाख यात्री…अधूरे विस्तार से सांसत में लोगों की जान
जेदवी / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन कही जानेवाली लोकल ट्रेनों से हर दिन सफर करनेवाले करीब ८० लाख यात्री अव्यवस्था और सुरक्षा संकट के दौर से गुजर रहे हैं। महानगर की पश्चिम और मध्य रेलवे उपनगरीय सेवाओं से प्रतिदिन लगभग ७५ से ८० लाख यात्री सफर करते हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या के मुकाबले रेलवे का बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर साबित हो रहा है। हालत यह है कि पीक आवर्स में लोकल से यात्रा करना किसी जोखिम से कम नहीं है।
दादर, कुर्ला, ठाणे, घाटकोपर और बोरिवली जैसे प्रमुख स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म और फुटओवर ब्रिज यात्रियों की संख्या के मुकाबले काफी छोटे पड़ गए हैं। ट्रेनों से एक साथ उतरने और चढ़नेवाली भीड़ के कारण रोजाना जाम, धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति बनती है। कई बार मामूली चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
क्षमता से तीन गुना अधिक भीड़
एक १२ या १५ डिब्बों वाली लोकल ट्रेन की सामान्य क्षमता लगभग १,२०० से १,५०० यात्रियों की मानी जाती है, लेकिन पीक आवर्स में एक-एक ट्रेन में ४,५०० से अधिक यात्री ठसाठस भरकर सफर करते हैं। दरवाजों पर लटककर यात्रा करना हजारों यात्रियों की मजबूरी बन चुका है। इसी कारण ट्रेनों से गिरने, ट्रैक पार करते समय दुर्घटनाओं और पोल से टकराने की घटनाओं में हर वर्ष सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है।
विस्तार योजनाओं की सुस्त रफ्तार
भीड़ कम करने के लिए रेलवे और मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन ने नई लाइनें, १५ डिब्बों वाली ट्रेनें और एसी लोकल जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन इनकी प्रगति बेहद धीमी है। कई रूटों पर पांचवीं और छठी लाइन का काम भूमि अधिग्रहण और घनी आबादी के कारण वर्षों से अटका हुआ है। वहीं १५ डिब्बों वाली ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म विस्तार और सिग्नलिंग अपग्रेड का काम भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है।
