सामना संवाददाता / मुंबई
अभी दो दिन पहले ही विधानसभा में राज्य में सूदखोरों के बढ़ते आतंक का मुद्दा उठाया गया था। इस पर सरकार ने आश्वासन दिया था कि सूदखोरों पर लगाम कसी जाएगी, लेकिन उसके अगले ही दिन लातूर से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए। आरोप है कि महज डेढ़ लाख रुपए के कर्ज के बदले गारंटर बने एक किसान की करीब सवा करोड़ रुपए मूल्य की पांच एकड़ कृषि भूमि सूदखोरों ने हड़प ली। इतना ही नहीं, अब भी उस पर ७३ लाख रुपए का बकाया बताया जा रहा है।
लातूर जिले से सूदखोरी और निजी साहूकारी के आतंक का यह बेहद चौंकानेवाला मामला सामने आया है। यह घटना निलंगा तालुका के नानंद गांव की है, जहां दोस्त के लिए कर्ज का गारंटर बनना एक किसान के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत बन गया। पीड़ित किसान पुंडलिक भोसले के एक मित्र ने आर्थिक तंगी के चलते एक निजी साहूकार से पांच प्रतिशत मासिक ब्याज पर डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे। इस कर्ज के लिए पुंडलिक भोसले गारंटर बने थे। आरोप है कि कर्ज की वसूली के नाम पर साहूकार ने भोसले की करीब सवा करोड़ रुपए मूल्य की पांच एकड़ कृषि भूमि अपने नाम करवा ली।
हैरानी की बात यह है कि जमीन हस्तांतरित होने के बाद भी साहूकार का उत्पीड़न नहीं रुका। वह अब भी ७० से ८० लाख रुपए का कर्ज बकाया होने का दावा करते हुए लगातार वसूली का दबाव बना रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि ब्याज के नाम पर ३० से ४० हजार रुपए नकद और साढ़े तीन एकड़ जमीन देने के बावजूद साहूकार का कहना है कि कर्ज अभी समाप्त नहीं हुआ है। विरोध करने पर गाली-गलौज, धमकियां और मारपीट तक की गई। आरोप है कि एक साहूकार का कर्ज नहीं चुका पाने पर दूसरा साहूकार बीच में लाकर नया कर्ज दिलाया जाता है।
२० से २२ लोग गांव छोड़ने को मजबूर
निजी साहूकारों के इस कथित आतंक से नानंद गांव में भय का माहौल है। बताया जा रहा है कि उत्पीड़न से तंग आकर गांव के २० से २२ लोग गांव छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, साहूकार महज तीन महीने की अवधि के लिए पांच प्रतिशत मासिक ब्याज पर कर्ज देते हैं और इसके लिए दो जमानतदारों की शर्त रखते हैं। समय पर मूलधन और ब्याज नहीं चुकाने पर प्रतिदिन हजारों रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इतना ही नहीं, कर्जदारों और जमानतदारों को कथित तौर पर धमकाकर प्रताड़ित भी किया जाता है।
