-किसी को लगा करंट तो कोई खुले गटर में डूबा
-हादसों ने खोली प्रशासन की पोल
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं विभाग के इंतजाम और तैयारियों की भी पोल खोल दी है। कई जगह ड्रेनज सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आया। जलभराव, खुले मैनहोल, खुले बिजली के तार, जर्जर इमारतें और बिना सुरक्षा के चल रहे निर्माण कार्य बारिश के बीच जानलेवा साबित हुए। पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग हादसों में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने जिम्मेदार विभागों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कल्याण-डोंबिवली इलाके में २६ वर्षीय शशि राहुल खुले बिजली के तार की चपेट में आ गया। भारी बारिश के कारण सड़क पर पानी भरा था और उसमें बिजली का तार गिरा हुआ था। पानी में करंट दौड़ रहा था, जिसकी जानकारी नहीं होने के कारण शशि उसमें उतर गया। करंट लगते ही मौके पर मौत हो गई।
पालघर जिले के चहाडे गांव का २८ वर्षीय किशन वरठा मछली पकड़ने के लिए नदी में उतरा था। लगातार बारिश के कारण नदी उफान पर थी। इसी दौरान तेज बहाव में वह बह गया। अगले दिन नदी में शव मिला। ठाणे के मुंब्रा इलाके में १७ वर्षीय आलिया बारिश के दौरान करंट की चपेट में आ गई। जलभराव के बीच किसी बिजली के खंभे या खुले तार से करंट पानी में पैâल गया था। सड़क पार करते समय करंट लगने से मौत हो गई। मुंबई में ५५ वर्षीय असलम शेख बारिश के दौरान सड़क पर बने खुले मैनहोल में गिर गए और तेज बहाव में बह गए। बाद में उनका शव बरामद किया गया। इसी तरह मुंबई में तेज बारिश और हवा के बीच सड़क किनारे खड़ा पेड़ अचानक स्कूल बस पर गिर गया। हादसे में ११ वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे घायल हुए। वालकेश्वर इलाके में ५१ वर्षीय संतोष रामचंद्र भरसकर पर पुरानी इमारत का स्लैब गिर गया और मलबे में दबने से मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत काफी पुरानी थी। पनवेल के कामोठे इलाके में ४५ वर्षीय सुरेश लोखंडे घर के अंदर मौजूद था, तभी लगातार बारिश के बीच मकान का स्लैब गिर गया। मलबे में दबने से उसकी मौत हो गई। भिवंडी में २८ वर्षीय मुस्तफा शेख सड़क पर पड़े खुले बिजली के तार की चपेट में आ गया। तार के संपर्क में आते ही करंट लगा और मौके पर मौत हो गई। पुणे के लोणी कालभोर इलाके में दो वर्षीय सोहम लखन कसबे घर के बाहर खेल रहा था। सीवेज और बारिश के पानी की निकासी के लिए खोदे गए गड्ढों को बिना बैरिकेडिंग के खुला छोड़ दिया गया था। उसमें गिरने से सोहम की मौत हो गई।
आखिर मौत का जिम्मेदार कौन?
इन नौ घटनाओं में वजह अलग-अलग दिखती है, लेकिन एक कड़ी समान नजर आती है, वो है लापरवाही। कहीं खुले बिजली के तार, कहीं बिना ढके मैनहोल, कहीं अधूरा निर्माण कार्य, कहीं जर्जर इमारतें और कहीं मानसून से पहले सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी। सवाल यह है कि अगर समय रहते मरम्मत, निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था पूरी होती, तो क्या इन नौ मौतों को रोका जा सकता था? यही सवाल अब प्रशासन, स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के सामने खड़ा है।
