मुख्यपृष्ठनए समाचारऑनलाइन स्टाफ मंजूरी के खिलाफ शिक्षकों का हल्लाबोल...७,५०० शिक्षकों की नौकरी पर...

ऑनलाइन स्टाफ मंजूरी के खिलाफ शिक्षकों का हल्लाबोल…७,५०० शिक्षकों की नौकरी पर खतरा!.. सरकार के खिलाफ ६ जुलाई को आजाद मैदान में महाधरना

जेदवी / मुंबई

महाराष्ट्र के कनिष्ठ (जूनियर) महाविद्यालयों के शिक्षकों ने ऑनलाइन स्टाफ मंजूरी (संच मान्यता) के लिए लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ने बिना चर्चा और सहमति के ऐसे नियम लागू किए हैं, जिनसे हजारों शिक्षकों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। इसी के विरोध में महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालयीन शिक्षक महासंघ ने सोमवार, ६ जुलाई २०२६ को सुबह ११ बजे से मुंबई के आजाद मैदान में धरना आंदोलन करने का एलान किया है। महासंघ का कहना है कि सरकार के उदासीन रवैये ने शिक्षकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।
महासंघ के समन्वयक प्रो. मुकुंद आंधलकर के अनुसार, संशोधित ऑनलाइन स्टाफ मंजूरी के नए मानदंडों के कारण राज्य में लगभग ७,००० से ७,५०० शिक्षकों के पद प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले ५० वर्षों से प्रचलित नियमों के आधार पर ही स्टाफ मंजूरी दी जाती रही है, लेकिन अब सरकार ने बिना पर्याप्त चर्चा के नए नियम लागू कर दिए हैं।
महासंघ ने लगाए आरोप
महासंघ ने आरोप लगाया है कि शिक्षा मंत्री दादासाहेब भुसे ने पदभार संभालने के बाद इस मुद्दे पर शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ कोई गंभीर चर्चा नहीं की। संगठन ने कई बार ज्ञापन दिए, अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और समाधान की मांग उठाई, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
सरकार ने की मांगों की अनदेखी
सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए शिक्षकों ने पहले भी कई आंदोलन किए हैं। ११ मई को आयुक्त एवं शिक्षा संचालक कार्यालय पर मोर्चा निकाला गया, १ जून को राज्यभर में संशोधित मसौदे की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया और २३, २४ तथा २५ जून को शिक्षा उपसंचालक कार्यालयों के सामने धरना दिया गया। इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगों की अनदेखी की।
महासंघ ने दी चेतावनी
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया और नियमविरुद्ध प्रावधान वापस नहीं लिए तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

अन्य समाचार