-डॉ. रवीन्द्र कुमार
इस प्रकार के शीर्षक ऐसा आभास देते हैं, जैसे आईएएस और आईपीएस बनने के लिए किसी शैक्षिक योग्यता अर्थात पढ़ाई-लिखाई की ज़रूरत नहीं है। बस सीधे-सीधे आपका इंटरव्यू लिया जाएगा और आपको तैनाती दे दी जाएगी। अभी मेरी नज़रों से एक और हेडलाइन गुजरी, जो 12वीं नहीं बल्कि कह रही है कि फलां ‘5वीं फेल’ आईएएस बन गई। यानी अगर 12वीं फेल आई.पी.एस. बन सकता है, तो यह उससे भी एक कदम आगे की बात है, जहां मोहतरमा महज़ 5वीं फेल हैं और आईएएस बन गई हैं। सच तो यह है कि ये हेडलाइंस गुमराह करने वाली हैं। दरअसल, कभी अपने शैक्षिक करियर में वे 5वीं या 12वीं कक्षा में फेल हुए होंगे, मगर इसका मतलब यह नहीं कि फिर वे सीधे यूपीएससी पहुंच गए कि अब हमें आईएएस/आईपीएस बना दो।
जिन्हें पता न हो, उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि इस सिविल सेवा परीक्षा के लिए आपका स्नातक होना न्यूनतम योग्यता है। अब चाहे आपने बीए किया हो, बीकॉम किया हो या बीएससी। मोटे तौर पर आपका स्नातक होना अनिवार्य है। फिर आप डॉक्टर हों, इंजीनियर हों, बीडीएस हों, बीफार्म हों या बीबीए/बीसीए। यह शैक्षिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से होनी चाहिए। अर्थात न केवल आपकी डिग्री, बल्कि जिस संस्थान से आपने पढ़ाई की है, वह भी मान्यता प्राप्त होना चाहिए। हां, उम्र की बात करें तो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी 32 वर्ष तक परीक्षा दे सकते हैं। इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को पांच वर्ष तथा अन्य पिछड़ा वर्ग को तीन वर्ष की छूट मिलती है। इसी प्रकार प्रयासों (चांस) की संख्या भी निर्धारित है।
अब यह कहना कि फलां 12वीं पास कालांतर में आईपीएस बन गया या फलां 5वीं पास आईएएस बन गई, सही है, मगर न्यूनतम स्नातक बनने के बाद। यह वैसे ही है जैसे कोई कहे कि निमोनिया ग्रस्त व्यक्ति ने रेस जीत ली। अरे भाई, निमोनिया उसे बचपन में हुआ था। अब वह रेस जीतने लायक है, इसलिए जीत ली। यह नहीं कि जब वह दौड़ रहा था, तब निमोनिया से पीड़ित था।
एक और बीमारी आजकल चल पड़ी है कि फलां के पिता तांगा चलाते थे, उनका लड़का आईएएस बन गया। फलां मजदूर का बेटा आईपीएस बन गया अथवा फलां की मां बर्तन मांजती थीं और बेटी ने आईएएस बनकर दिखाया। ऐसी खबरें इसलिए चलाई जाती हैं कि आप भी परीक्षा देने के लिए प्रेरित हों। इस आईएएस परीक्षा ने जितने घर बसाए नहीं हैं, उससे कहीं अधिक युवाओं को लाइन से बे-लाइन, यानी डिरेल किया है। एक तो हमेशा के लिए यह दर्द दे दिया कि हाय, हम क्यों नहीं बन पाए? फलां तो मुझसे भी ज्यादा नालायक था, वह बन गया। दूसरे, उनके विचारों में एक प्रकार का टेढ़ापन आ जाता है। बहुधा वे आईएएस अधिकारियों को ही कोसने लगते हैं।
एक सज्जन बोले कि रामलाल मेरे बैच का आईएएस है। मैं असमंजस में था, क्योंकि वे स्वयं आईएएस नहीं थे। फिर वे बोले, जिस साल मैंने परीक्षा दी थी, मैं रह गया था और रामलाल पास हो गया था। तो हुआ न मेरे बैच का!
यह परीक्षा कोई तुक्का नहीं है और न ही इसे गंभीर अभ्यर्थियों को हल्के में लेना चाहिए। यह एक साधना की तरह है। आपको दीन-दुनिया की बातों से दूर एक ऐसी गुफा में जाना होता है, जहां न सोशल मीडिया हो और न दोस्त-यार। यह कम से कम दो से तीन वर्ष की तपस्या मांगती है। आप उनसे अपनी तुलना न करें, जो जीनियस हैं, गॉड-गिफ्टेड हैं अथवा लकी हैं। मेहनत पहली शर्त है। दूसरा आपका भाग्य, वह भी केवल इतना कि आपने जो अच्छे से पढ़ा है, वही प्रश्न परीक्षा में आ जाएं। जैसा मैंने कहा, यहां कोई तुक्का काम नहीं आता। आपकी योग्यता को इतनी कसौटियों पर परखा जाता है कि संयोग या अनुमान की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
प्रारंभिक परीक्षा (जिसमें नेगेटिव मार्किंग होती है) में प्रश्न अधिक और समय कम होता है। इसके बाद मुख्य परीक्षा होती है, जिसमें नौ प्रश्नपत्र होते हैं-
1. सामान्य हिन्दी (300 अंक)
2. सामान्य अंग्रेजी (300 अंक)
(ये दोनों प्रश्नपत्र केवल क्वालिफाइंग होते हैं। अर्थात इन्हें उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। इनमें असफल होने पर शेष प्रश्नपत्रों का मूल्यांकन नहीं किया जाता। इनके अंक मेरिट में नहीं जुड़ते।)
3. निबंध (250 अंक)
4. सामान्य अध्ययन-I (250 अंक) – इतिहास, विरासत एवं समाज
5. सामान्य अध्ययन-II (250 अंक) – राजनीति, शासन एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध
6. सामान्य अध्ययन-III (250 अंक) – अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं सुरक्षा
7. सामान्य अध्ययन-IV (250 अंक) – नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि (एप्टीट्यूड)
8. वैकल्पिक विषय, प्रश्नपत्र-I (250 अंक)
9. वैकल्पिक विषय, प्रश्नपत्र-II (250 अंक)
(एक वैकल्पिक विषय 48 विषयों की सूची में से चुनना होता है, जिसके दो प्रश्नपत्र होते हैं।)
आपका कोई दांव काम नहीं आएगा, केवल मेहनत काम आएगी। इसके बाद 40 से 45 मिनट का इंटरव्यू होता है, जिसे पांच से सात वरिष्ठ विशेषज्ञ लेते हैं। फिर विस्तृत मेडिकल जांच होती है। मेडिकल में आपको कोई दौड़ नहीं लगानी होती और न ही दंड-बैठक करनी होती है। केवल पूर्व निर्धारित चिकित्सकीय मानकों पर खरा उतरना होता है।
चयन होने के बाद आपको कौन-सी सेवा मिलेगी, यह आपकी रैंक, रिक्तियों की संख्या और आपकी वरीयता (चॉइस) पर निर्भर करता है।
याद रखें, जो चुने जाते हैं, वे भी हमारी-आपकी तरह ही सामान्य लोग होते हैं। आपको तो बस एक सीट चाहिए। इसे इस तरह समझिए कि यदि किसी वर्ष एक हजार रिक्तियों का विज्ञापन है, तो प्रारंभिक परीक्षा में भले आठ लाख या दस लाख अभ्यर्थी बैठें, लेकिन पास केवल रिक्तियों के लगभग दस गुना, यानी दस हजार अभ्यर्थी ही किए जाएंगे। ये दस हजार मुख्य परीक्षा देंगे। मुख्य परीक्षा के बाद इनमें से लगभग दो हजार अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा और अंत में इन्हीं दो हजार में से लगभग एक हजार का चयन होगा।
ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें (कोई फीस नहीं):
hrminterventions@gmail.com
