सामना संवाददाता / वाराणसी
खाकी वर्दी के साथ कलम की स्याही का संगम जब होता है, तो समाज को जितेन्द्र कुमार दुबे जैसा व्यक्तित्व मिलता है। वाराणसी के मार्कण्डेय महादेव, कैथी निवासी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं कवि जितेन्द्र कुमार दुबे को साहित्य और समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था स्वर्गविभा परिवार ने ‘डॉ. तारा सिंह साहित्य राष्ट्रीय सम्मान-2026’ से सम्मानित किया है।
वर्तमान में एडीशनल डीसीपी, मध्य कमिश्नरेट, लखनऊ के पद पर कार्यरत जितेन्द्र कुमार दुबे ने प्रशासन और साहित्य, दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.एससी. (जियोफिजिक्स) में स्वर्ण पदक हासिल किया। विज्ञान के छात्र होने के बावजूद साहित्य के प्रति उनका अनुराग शुरू से ही प्रखर रहा।
स्वर्गविभा परिवार द्वारा जारी प्रशस्ति-पत्र में उनके साहित्यिक अवदान, सृजनात्मक प्रतिबद्धता और सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन में किए गए कार्यों की विशेष सराहना की गई है। संस्था ने उनकी सतत साहित्य-साधना और उत्कृष्ट रचनाधर्मिता को देखते हुए यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।
जितेन्द्र कुमार दुबे की कविताओं में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएं और राष्ट्रप्रेम की झलक मिलती है। कानून-व्यवस्था संभालने के साथ-साथ वे शब्दों के जरिए समाज को नई दिशा देने का कार्य भी कर रहे हैं।
इस उपलब्धि पर उनकी पत्नी बीना दुबे समेत साहित्य, शिक्षा और प्रशासनिक जगत की कई हस्तियों ने उन्हें बधाई दी है। लोगों ने कहा कि यह सम्मान न सिर्फ दुबे परिवार, बल्कि पूरे वाराणसी जनपद और उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
एक पुलिस अधिकारी का साहित्य के शीर्ष सम्मान तक पहुंचना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी वर्दी की मोहताज नहीं होती। जितेन्द्र कुमार दुबे का जीवन युवा पीढ़ी के लिए यह संदेश है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो प्रशासन और सृजन दोनों एक साथ साधे जा सकते हैं। वर्दी का अनुशासन और कलम की संवेदना जब मिलते हैं, तो समाज को एक नई रोशनी मिलती है।
