-२३ नवंबर को मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई हो रहे हैं रिटायर
-अडानी को प्रोजेक्ट देने के खिलाफ ‘सेकलिंक’ ने दायर की है याचिका
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कल यूएई की सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन की याचिका पर सुनवाई दिसंबर के पहले सप्ताह तक स्थगित कर दी। इसमें मुंबई की रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को अडानी को देने के महाराष्ट्र सरकार के पैâसले को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि सीजेआई इस मामले में सुनवाई पूरी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि वह २३ नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। इस दौरान सीजेआई गवई ने मौखिक रूप से कहा कि हमारे हाथ में बहुत से मामले हैं, मैं कितने पैâसले लिखूंगा?
अब दिसंबर में होगी ‘धारावी’ की सुनवाई!
धारावी के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अब इस मामले की सुनवाई दिसंबर में होगी। हाई कोर्ट ने पुनर्विकास का रास्ता साफ कर दिया था और परियोजना के लिए अडानी समूह को दी गई निविदा को बरकरार रखा था और कहा था कि निर्णय में कोई मनमानापन, अनुचित तरीका या गड़बड़ी नहीं थी।
हाई कोर्ट ने दिया था झटका
इस प्रक्रिया में हाई कोर्ट ने सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन की याचिका को खारिज कर दिया था। इसमें राज्य सरकार की ओर से मेगा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को अडानी प्रॉपर्टीज को सौंपे जाने के पैâसले को चुनौती दी गई थी। जिसने ५,०६९ करोड़ रुपए की पेशकश की थी। सेकलिंक २०१८ में ७,२०० करोड़ रुपए की पेशकश के साथ इस परियोजना के लिए सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी थी, लेकिन बाद में सरकार ने इस निविदा को रद्द कर दिया था।
अडानी समूह २०२२ की निविदा प्रक्रिया में सबसे बड़ा बोलीदाता बनकर उभरा और उसने ५,०६९ करोड़ रुपए के प्रस्ताव के साथ २५९ हेक्टेयर का यह प्रोजेक्ट हासिल कर लिया। सेकलिंक ने हाई कोर्ट के पैâसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। शीर्ष अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अडानी को परियोजना के लिए भुगतान एक ही बैंक खाते के माध्यम से करने का निर्देश दिया।
४ साल बाद नई निविदा
सेकलिंक की याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने उसकी इस दलील को भी खारिज कर दिया था कि निविदा निजी समूह की एक विशेष फर्म के अनुरूप तैयार की गई थी। उसने कहा था कि इस प्रक्रिया में तीन बोलीदाताओं ने भाग लिया था। सरकार ने कहा कि २०१८ की निविदा रद्द कर दी गई थी और चार साल बाद एक नयी निविदा जारी की गई थी, क्योंकि कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई कारकों ने वित्तीय और आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया था।
