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‘न्याय का मंदिर बनाइए, सात सितारा होटल नहीं!’ …पूर्व सीजेआई बी. आर. गवई की बात पर आर्किटेक्ट ने नहीं दिया ध्यान

-हफीज कॉन्ट्रैक्टर की आकृति पूर्व मुख्य न्यायाधीश की बात से मेल नहीं खाती
राजन पारकर / मुंबई
मुंबई का हाल भी अजब है। यहां अगर कोई फुटपाथ पर चाय बेचने लगे तो मनपा वाले तुरंत पूछ लेते हैं, ‘परमिट है क्या?’ लेकिन हाई कोर्ट की नई इमारत जब सात सितारा होटल के ‘स्वप्नलोक’ में पहुंच जाए, तब पूछने वाला कोई नहीं, सिवाय दो-चार ईमानदार आवाजों के, जिन्हें सुनकर व्यवस्था के कान में जैसे रुई भर जाती है। बीकेसी में बनने वाली हाई कोर्ट की नई बिल्डिंग का मामला कुछ ऐसा ही है। भूमिपूजन के दिन तत्कालीन सीजेआई बी.आर. गवई साहब ने जो कहा, वह तो सीधे-सीधे देवताओं की भाषा थी, ‘न्याय का मंदिर बनाइए, सात सितारा होटल नहीं!’ कहने का अर्थ यह कि भगवान का घर बनाइए, रिसेप्शनिस्ट वाला लॉबी नहीं। लेकिन लगता है डिजाइन बनाने वालों को यह वाक्य उनके ओरिजिनल प्लान में फिट नहीं बैठा। क्योंकि हफीज कॉन्ट्रैक्टर साहब का डिजाइन देखकर ऐसा लगता है कि मानो हाई कोर्ट नहीं, बीकेसी का नया ‘ज्यूडिशियल रिसॉर्ट एंड स्पा’ तैयार हो रहा हो।
पूर्व जस्टिस गौतम पटेल की भाषा में इतनी ईमानदारी और आग थी कि उसे पढ़कर लगता है, अगर यह बिल्डिंग बन गई तो वकील और आम आदमी को ढूंढने के लिए ड्रोन वैâमरा लगाना पड़ेगा। उन्होंने इसे ‘अलोकतांत्रिक’, ‘कॉलोनियल’, ‘ईस्ट इंडिया कंपनी की सोच से प्रेरित’ बताया। बिलकुल ठीक कहा। भारत में अंग्रेजों की आखिरी निशानी शायद रेलगाड़ी नहीं होगी, बल्कि यही नई हाई कोर्ट बिल्डिंग होगी, जिसे देखकर लॉर्ड कर्जन भी शाबाशी देगा। जस्टिस पटेल का सबसे बड़ा तंज यही था कि डिजाइन को वकीलों, मुकदमे लड़ने वालों या आम जनता के लिए नहीं, सीधे ‘जजों को देवताओं के आसन’ पर बैठाने के लिए बनाया गया है। वेटिंग एरिया छोटा, वकीलों की जगह कम, वादियों के लिए सुविधा शून्य। बाकी सब ‘राजशाही का प्रताप’। उन्होंने तो साफ कह दिया, ‘यह डिजाइन सिर्फ इस भाव के लिए बना है कि मुकदमा लड़ने वाला कोर्ट के सामने हाथ जोड़े।’ वाह रे लोकतंत्र! न्याय के मंदिर में सुविधा नहीं, भक्ति और प्रार्थना चाहिए। आर्किटेक्चर विशेषज्ञ मुंतसिर दलवी को नई बिल्डिंग में ‘भारत में अंग्रेजी राज की वापसी’ दिखी। उन्होंने कहा, यह डिजाइन कोलकाता के गवर्नर हाउस का नकलचंद है और उसे आधुनिक बताने की कोशिश ऐसी है जैसे कोई ‘डायल-अप इंटरनेट’ को ५जी बताने पर तुला हो।

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