लाचार महिला ने अस्पताल की दहलीज पर ही दिया बच्चे को जन्म, नवजात की मौत
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई। बदायू के अस्पताल से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गर्भवती महिला को अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा। यहां के उझानी के सिरसौली गांव की एक गर्भवती महिला का अस्पताल की बिल्डिंग की गैलरी में ही सोमवार रात प्रसव कराना पड़ गया। आरोप है कि समय पर चिकित्सकीय सहायता न मिलने के कारण नवजात की मौत हो गई। मौके पर सुरक्षाकर्मी भी तैनात नहीं थे। घटना को लेकर महिला अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बता दें कि सिरसौली गांव निवासी सविता पत्नी सूरज को सोमवार रात प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने गांव की आशा कार्यकर्ता सीमा को बुलाया। इस दौरान एंबुलेंस पर कॉल की, जो ३५ मिनट के इंतजार के बाद भी नहीं पहुंची। पीड़ा लगातार बढ़ती जा रही थी। ऐसे में आशा कार्यकर्ता और पति सूरज ई-रिक्शा से सविता को महिला अस्पताल, बदायूं लेकर पहुंचे। सूरज पत्नी को महिला अस्पताल की बिल्डिंग में ले जाने लगा। हालत खराब होने पर उसे १०० शैया बिल्डिंग की गैलरी में बैठाकर डॉक्टरों को बुलाने के लिए अंदर भागता हुआ गया। पति सूरज का कहना है कि उसने तुरंत मदद के लिए आवाज लगाई, लेकिन आधे घंटे तक कोई डॉक्टर या नर्स मौके पर नहीं पहुंचे। इसी दौरान महिला अस्पताल की बिल्डिंग के अंदर गैलरी में उसका प्रसव हो गया। बाद में जब स्टाफ पहुंचा तो प्रसूता को डिलिवरी रूम में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद नवजात बच्ची को मृत घोषित कर दिया। पीड़ित पति ने बताया कि समय पर इलाज न मिलने से उसकी नवजात की जान चली गई।
सुरक्षाकर्मी मौजूद होते तो बच सकती थी नवजात की जान
पिछले दिनों सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश पाल सिंह ने महिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। जब उनको मौके पर दो गार्ड तैनात नहीं मिले। इसकी रिपोर्ट उन्होंने उच्चाधिकारियों को दी। चर्चा है कि महिला अस्पताल प्रशासन उस रिपोर्ट को गलत बता रहा था। वहीं अब एक बार फिर रात में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। रात में अगर सुरक्षाकर्मी मौके पर मौजूद होते तो शायद डॉक्टर समय से मरीज के पास आ जाते तो नवजात की जान बच सकती थी।
