-लगाई मनपा को फटकार
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई हाई कोर्ट ने चीफ जस्टिस के घर पर देर शाम हुई एक स्पेशल सुनवाई में बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (मनपा) को हाई कोर्ट या निचली अदालतों के कोर्ट स्टाफ को चुनाव ड्यूटी के लिए उनकी सर्विस मांगने वाला कोई भी लेटर जारी करने से रोक दी है। कोर्ट ने मनपा आयुक्त के उन लेटर पर रोक लगा दी है, जिनमें ज्यूडिशियल स्टाफ को सिविक चुनाव ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। कोर्ट ने आयुक्त के ऐसे लेटर जारी करने के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया है।
चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अश्विन डी भोबे की स्पेशल बेंच ३० दिसंबर, २०२५ को रात ८ बजे एक ‘सुओ मोटो’ केस की सुनवाई के लिए इकट्ठा हुई। यह केस मनपा आयुक्त के ज्यूडिशियल स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने से मना करने के बाद शुरू हुआ था। बीएमसी कमिश्नर-कम-डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर ने २९ दिसंबर, २०२५ को एक लेटर जारी किया, जिसमें ज्यूडिशियरी की उस रिक्वेस्ट को सीधे मना कर दिया गया था, जिसमें सबऑर्डिनेट कोर्ट के स्टाफ को इलेक्शन के काम से छूट देने की बात कही गई थी। इसके बाद स्टाफ को ३० दिसंबर को दोपहर ३:०० बजे तक ड्यूटी पर आने का आदेश दिया गया। यह निर्देश तब भेजा गया जब चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, एस्प्लेनेड, मुंबई और एक रजिस्ट्रार ने बीएमसी, कलेक्टर और दूसरे अधिकारियों को इस बारे में २००८ में हाई कोर्ट के पैâसले के बारे में बताया था और कोर्ट स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने की रिक्वेस्ट की थी। बेंच ने कहा कि बीएमसी ने कई बार बातचीत करने के बावजूद रिक्विजिशन पर काम किया और बताया कि हाई कोर्ट, भारत के संविधान के आर्टिकल २३५ के तहत, स्टाफ सहित निचली अदालतों पर पूरा कंट्रोल और सुपरविजन रखता है।
एफिडेविट फाइल करने का दिया निर्देश
कोर्ट ने चुनाव आयोग के तरीकों का भी जिक्र किया, जिसके तहत ज्यूडिशियल स्टाफ रखने से पहले हाई कोर्ट से पहले मंजूरी लेनी पड़ती है। कोर्ट ने मनपा के वकील की विवादित कम्युनिकेशन वापस लेने की रिक्वेस्ट को भी खारिज कर दिया और मनपा आयुक्त को ‘एक पर्सनल एफिडेविट’ फाइल करने का निर्देश दिया, जिसमें वे ‘पावर और जूरिस्डिक्शन’ बताएं, जिनके तहत उन्होंने डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियल स्टाफ को सिविक इलेक्शन ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए थे।
