सामना संवाददाता / मुंबई
रेलवे स्टेशन के पास भांडुप इलाके में हुए बस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और ९ लोग घायल हो गए। हादसे के बाद स्थानीय लोगों का मनपा और फेरीवालों पर गुस्सा फूट पड़ा है। भांडुप के लोग लंबे समय से शिकायत कर रहे थे कि रेलवे स्टेशन के बाहर फेरीवालों, ऑटोरिक्शा और बसों की वजह से जाम लग जाता है और उन्हें चलने की भी जगह नहीं मिलती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह एक खुला भ्रष्टाचार है। फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई ऊपरी तौर पर होती है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में लोकल लेवल पर अधिकारियों को रिश्वत दी जाती है।
बता दें कि मुंबई में स्टेशन रोड पर हुआ पहला एक्सीडेंट नहीं था। वैसे तो पूरे शहर में सड़कों पर जाम लगना आम बात है, लेकिन ‘स्टेशन रोड’ पर यह बहुत ज्यादा होता है, जहां हर जगह भारी भीड़ होती है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि फुटपाथ पर अतिक्रमण पैदल यात्रियों के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन गया है। रेलवे स्टेशनों के बाहर की सड़कें अतिक्रमण से भरी होने की वजह से पैदल यात्रियों को सड़क पर वाहनों से बच-बचकर चलना पड़ता है।
नहीं है कोई खास गाइडलाइन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रेलवे स्टेशन जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों के बाहर सड़कों को डिजाइन करने के लिए कोई खास गाइडलाइंस नहीं हैं। सरकार ने पिछले कुछ सालों में रेलवे स्टेशनों के बाहर स्काईवॉक बनाए हैं, लेकिन वे पीक आवर्स में बहुत ज्यादा भीड़ को देखते हुए इस समस्या को पूरी तरह से हल नहीं कर पाए हैं।
मनपा रोती है रोना
वहीं मनपा इस बात का रोना रोती है कि अतिक्रमण हटाते हैं, लेकिन फेरीवाले फिर से आ जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण टाउन वेंडिंग कमेटी का ठीक से काम न करना है, जो कोर्ट के मामलों की वजह से रुकी हुई थी। कोई सर्वे नहीं हुआ है इसलिए उन्हें वैध और अवैध फेरीवालों के नाम नहीं पता हैं, जिससे उन्हें हटाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
स्थानीय समाज सेवक अजय शर्मा का कहना है सरकार व प्रशासन को कुर्ला, दादर और ठाणे जैसे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या के बारे में पता है। उन्हें रेलवे स्टेशनों और बाहर यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए। आमतौर पर राज्य और रेलवे अधिकार क्षेत्र को लेकर झगड़ते रहते हैं। उन्हें इस समस्या के समाधान के लिए मिलकर एक रास्ता निकालना चाहिए।
भांडुप के रहने वाले सुनील सावंत ने बताया गाड़ी से जाना तो छोड़िए, भांडुप स्टेशन से बाहर निकलकर मेन एलबीएस रोड तक पैदल पहुंचना भी एक जंग लड़ने के बराबर है। ऑटोरिक्शा और बसें लगातार हॉर्न बजाती रहती हैं और फुटपाथ पर फेरीवालों ने कब्जा कर लिया है।
