मुख्यपृष्ठस्तंभमैथिली व्यंग्य : बसिया पाबनि!

मैथिली व्यंग्य : बसिया पाबनि!

डॉ. ममता शशि झा मुंबई

‘माँ एतेक अबेर किया भ गेल‌ आई?’ पिंटु तमसा के गाल फुलेने अपन माय सुरेखा के पूछलक।
‘हँ काल्ही नया साल छई ने त हमर मालकिन ओत पार्टी छनि ओहि के तैयारी कर में अबेर भे गेल’ सुरेखा बजलि।
पिंटु, ‘हमरो दोस्त सब कहई छलई जे हमहुँ सब मिल के नया साल के पार्टी करब ओहि लेल ओ सब बड़ी काल तक रुकल छलई पूछ लेल, मुदा अहाँ दुनु गोटेमे स क्यो नहि ऐलियई, जे हम ओकरा सबके हँ कहितियई।
सुरेखा के पति रमेश ऑनलाइन डिलिवरी के काजि एकटा प्रसिद्ध कंपनीमे करई छलखिन। ‘बेटा तोहर पापा के ते एखन बहुत व्यस्तता रहतनि, एखन ते लोक सबहक ओनलाइन ऑर्डर बहुत रहतई त हुनका घर आबमे बहुत देरी भे जेतनि।’
सुरेखा, ‘आई तू केना जल्दी आबि गेलहिं?’
पिंटु स्कूल के बाद लिली मैडम, जिनकर पति पर्यटन विभागमे अफसर छलखिन हुनकर कुकुर के खेलाब लेल जाय छलई। शुरू-शुरूमे ते बड़ डर लगई, मुदा धीरे-धुरे अपन खेलाय के उम्रमे कुकुर के खेलाब के नौकरी कर लागल। ओहि मालकिन ओत हुनका बेटा के खेलाब लेल सेहो एकटा नोकर छलई!!
पिंटु, ‘हमर कुकुर के सेहो न्यू ईयर पार्टीमे ले मालकिन गेलखिन आ आई अपन बेटा के सेहो, ओत कुकुर सबके लेल सेहो एकटा मैदानमे पार्टी के आयोजन छई, ओहि के लेल सेहो लोकसब के राखल गेल छई!!’
आ बगलेमे बच्चा सबहक लेल सेहो इंतजाम छई, जाहिमे बच्चा सबहक लेल सेहो पार्टी के आयोजन छई‌।
सुरेखा, ‘तू कोना बुझलहिन ई सब गप्प?’
पिंटु, ‘बड़की मालकिन के नौकर हुनका सबटा गप्प कहई छलनि, अपन बेटा के त लिली मैडम हुनका लग नहिं जाय दई छथिन त हमरे सबके ओ पाबनि-तिहार आ नया सालमे बजा के किछु-किछु दे दई छथिन। तहने सुनलियई।’
लिली मैडम हमरा कहने छलखिन जे तू चलबे ते चल, जत कुकुर सबहक खेनाई के व्यवस्था छई ओहि ठाम नोकरो-चाकर लेल व्यवस्था छई, आ तू रहबहि ते रेमो‌ (कुकुर) सेहो कंफर्टेबल रहतई। ओहुना आई-काल्ही ई सब एक-दोसरा संगे मिल-जुलि के नहिं रहइ छई, आ तोरो दोसर कुकुरके देखभाल कर बला सँ दोस्ती हेतुउ, आ ओकरा नब-नब कोन खेल खेलाब के से बुझबिहीन?
हुनकर बेटा जाय लेल‌ तैयार नहिं छलनि, त जे हुनका बेटा के संगे खेलाई छनि, ओकरा कहलखिन ते ओकरा मना केला पर लिली मैडम कहलखिन, ‘ओहुना तू सब आई थोड़े पार्टी करबे, तोहर सबके ते काल्हि बचल-खुचल ले के मनतऊ!’
माँ अपने सब कोनो पाबनि तिहार आ नबका साल बसिया कियेक ने मनबई छियई?

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