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तड़का : गर्दा उड़ा दो

कविता श्रीवास्तव
इन दिनों मुंबई में चुनावी माहौल है। लंबे इंतजार के बाद महानगरपालिका का चुनाव जो हो रहा है। सभी पार्टियों के कार्यकर्ताओं में टिकटों की आपाधापी है। नामांकन भरे जा चुके हैं। आज ही नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि भी है। कई जगह बागियों ने भी बिगुल फूंके हैं। कहीं निष्ठावानों को गर्दे की तरह उड़ाए जाने की खबर है तो नामांकन रद्द होने से कई की नगरसेवक बनने की उम्मीदें गर्दे में उड़ गई हैं। इसी बीच बीती रात मुंबई में झमाझम बारिश भी हो गई। भोर में ‘मॉर्निंग वॉक’ पर निकली तो बड़ी राहत थी। ठंडी हवाएं चल रही थीं। ठंडक का एहसास हो रहा था, लेकिन रोजाना की तरह धूल नहीं उड़ रही थी। यह बड़ा ही राहत भरा एहसास था। बारिश की फुहार ने गर्दे को जमीन पर लाकर बहा दिया था। मुंबई में इन दिनों धड़ाधड़ हो रहे कंस्ट्रक्शन के काम से प्रदूषण अपने चरम पर जा पहुंचा है। इसकी हर जगह चर्चा है। यहां तक कि हाई कोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लिया है, परंतु यह देखना सुखद रहा कि जिस प्रदूषण से पूरी मुंबई परेशान है, उसकी धूल को बारिश की एक झमाझम रोक सकती है। यह कुदरत की ताकत है इसीलिए घर लौटकर मैं सोचती रही कि कुदरत ने हमें कितनी बेहतरीन व्यवस्था दी थी। लेकिन आधुनिकता और विकास के चक्कर में हमने क्या कर डाला? मुंबई में बाग-बगीचे, पेड़-पौधे यदि व्यवस्थित तरीके से बचाए गए होते तो आज शायद प्रदूषण की इतनी बुरी अवस्था नहीं होती। मुंबई ही क्यों दुनिया में हर जगह प्रकृति के साथ हमने जो मजाक किया है उसका खामियाजा हमें ही भुगतना पड़ रहा है। इसीलिए जरूरत है कि अब भी प्रकृति की प्रदान की हुई व्यवस्था को बचाने में हम अपना योगदान दें। मुंबई में भी प्रदूषण को रोकने के लिए यदि आम नागरिक सक्रिय होकर पूरी ईमानदारी से यह प्रण लें कि हम गंदगी नहीं होने देंगे। विकास के क्रम में हम प्रकृति से बहुत ज्यादा छेड़छाड़ नहीं करेंगे। पेड़-पौधों को बचाने में हमारा भी योगदान होगा। तब इस चुनाव के बाद बनने वाली महानगरपालिका की सत्ता को हमारा भी सहयोग मिलेगा और मुंबई को हम गर्दे से बचा पाएंगे। यह हम सबके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। मुंबई में प्रदूषण की समस्या को लेकर महानगरपालिका के कान भी हाई कोर्ट ने खींचे हैं। इस चुनाव के बाद महानगरपालिका में जो नई सत्ता आएगी, उसके सामने प्रदूषण के रोकथाम की चुनौती भी होगी। शासन-प्रशासन तो अपना काम करेंगे ही। जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमारे भी कुछ कर्तव्य हैं। गंदगी को यहां-वहां फेंकने व हर जगह गंदा करने के बजाय हम साफ-सफाई में सहयोग देने और प्रदूषण को रोकने में सक्रिय रहें, यह भी जरूरी है। हम सब मिलकर कोशिश करें कि जब हम सब अच्छे स्वास्थ्य के लिए ‘मॉर्निंग वॉक’ पर निकलें तो शुद्ध हवा हमारा स्वागत करती हुई अपनी बांहों में हमें समेट ले।

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