-भ्रष्टाचार के आरोप में घिरीं मीरा देवी की उम्मीदवारी पर सवाल
सुरेश गोलानी / भायंदर
मीरा-भायंदर महानगरपालिका चुनाव से पहले भाजपा के स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी के ही एक नेता और पूर्व नगरसेवक ने टिकट बंटवारे में पक्षपात को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। पूर्व नगरसेवक अनिल भोसले ने सोशल मीडिया न्यूज चैनल के माध्यम से आरोप लगाया कि भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता को नगर की सेवा करने वाले ईमानदार और मेहनती कार्यकर्ता नहीं, बल्कि खुद की चाकरी करने वाले गुलाम चाहिए, जो उनकी चमचागीरी और निजी व्यवसाय में मदद करें।
यही वजह है कि शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सेवाएं (बीएसयूपी) आवास परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी मीरा देवी यादव को नागरिकों के विरोध के बावजूद विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रभाग क्रमांक १४ (ड) से उम्मीदवारी देकर निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर घोर अन्याय किया है। मीरा देवी यादव पर निशाना साधते हुए भोसले ने आरोप लगाया कि उन्होंने नगरसेवक पद का दुरुपयोग करते हुए न सिर्फ बीएसयूपी योजना में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया, बल्कि प्रॉपर्टी टैक्स और जलापूर्ति कनेक्शन के नाम पर लाखों की वसूली भी की है। भोसले कहते है कि टिकट हासिल करने के लिए योग्यता के नाम पर मीरा देवी के पास गिनाने के किए एक ही उपलब्धि है कि वो विधायक की निजी आवास योजना में फ्लैट बेचने का काम कुशलतापूर्वक और पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाती हैं।
गांव में सपाई, भायंदर में भाजपाई!
भोसले ने यह भी दावा किया कि यादव परिवार अपने गांव में समाजवादी पार्टी का चोला ओढ़ लेता है और मीरा भायंदर में भाजपाई बन जाता है।
भोसले के अलावा भाजपा के कई पूर्व नगरसेवकों और वरिष्ठ नेताओं द्वारा मेहता पर टिकट बंटवारे में आखिरी वक्त तक गुमराह करने, पक्षपाती भूमिका निभाने और मनमानी के आरोप लगाए हैं।
उधर टिकट बंटवारे में मनमानी के आरोपों को नकारते हुए विधायक के करीबी नेताओं ने दावा किया है कि पार्टी द्वारा किए गए सर्वेक्षण, सक्रियता, क्षमता और मेरिट के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन हुआ है।
