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थम नहीं रहा भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा… नासिक में शहराध्यक्ष को कार्यालय में किया कैद!

सुनील ओसवाल / मुंबई

महानगरपालिका चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में मची उथल-पुथल अब खुलकर सामने आ गई है। टिकट वितरण को लेकर नासिक में भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। टिकट से वंचित इच्छुक उम्मीदवारों ने गुरुवार को नासिक रोड स्थित भाजपा मंडल कार्यालय में शहराध्यक्ष सुनील केदार को ही बंधक बना लिया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को हस्तक्षेप कर उन्हें बाहर निकालना पड़ा।
बताया जाता है कि टिकट न मिलने से नाराज सैकड़ों कार्यकर्ता कार्यालय पर जमा हो गए थे। जैसे ही शहराध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष कार्यालय पहुंचे, नाराज कार्यकर्ताओं ने घेराव कर सवालों की बौछार शुरू कर दी। गुस्से में आकर कुछ लोगों ने शटर गिराकर नेताओं को अंदर ही बंद कर दिया। यह दृश्य भाजपा के ‘अनुशासन’ और ‘पार्टी संस्कृति’ के दावों की पोल खोलने के लिए काफी था। नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी नेताओं ने उन्हें दो साल तक चुनाव की तैयारी करने को कहा। घर-घर संपर्क, कार्यक्रम, प्रचार पर लाखों रुपए खर्च किए गए। यहां तक कि सोना-गहने तक बेचने पड़े। इसके बावजूद अंतिम वक्त पर टिकट किसी और को दे दिया गया। कार्यकर्ताओं का सवाल है,‘क्या यही भाजपा का न्याय है?’मामला यहीं नहीं रुका।
पार्टी कार्यालय से नहीं, फार्म हाउस से बांटे गए एबी फॉर्म
 भाजपा पदाधिकारी सचिन हांडगे ने टिकट वितरण में बड़े आर्थिक लेन-देन का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले एबी फॉर्म पार्टी कार्यालय से मिलते थे, लेकिन इस बार फार्म हाउस से फॉर्म बांटे गए।
 आरोप यह भी है कि जिन लोगों को फॉर्म दिए गए, वे कांग्रेस से आए हुए हैं। ‘अगर सर्वे में मेरा नाम नहीं था तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा,’ ऐसा खुला एलान भी किया गया।
 भाजपा शहराध्यक्ष ने भले ही ‘रिपोर्ट वरिष्ठों को भेजने’ की बात कही हो, लेकिन नासिक की सड़कों पर जो गुस्सा फूटा है, उसने साफ कर दिया है कि भाजपा के भीतर टिकट का खेल, पैसा और सत्ता की राजनीति चरम पर है और इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

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