मुख्यपृष्ठटॉप समाचारपब्लिक बोली... कुछ तो गड़बड़ है!..बिना मतदान के ही चुनावी चांदनी

पब्लिक बोली… कुछ तो गड़बड़ है!..बिना मतदान के ही चुनावी चांदनी

– भाजपा-शिंदे गुट के २२ नगरसेवक निर्विरोध

-बिना मतदान के ही चुनावी चांदनी

-भाजपा-शिंदे गुट के २२ नगरसेवक निर्विरोध

सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में होनेवाले मनपा चुनावों के लिए नामांकन हो चुका है। उसकी जांच के बाद नाम वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है। मतदान से पहले ही राजनीतिक दबाव, सौदेबाजी और रणनीतिक नाम वापसी के जरिए भाजपा, शिंदे गुट और दादा गुट की महायुति एक के बाद एक मनपाओं पर कब्जे की राह पर चल पड़ी है। बिना मतदान के ही इस चुनावी चांदनी पर पब्लिक का यही कहना है कि कुछ तो गड़बड़ है। कल्याण-डोंबिवली में जिस तरफ से निर्विरोध नगरसेवकों का चयन हो रहा है, उससे भविष्य में लोकतंत्र को बड़ा खतरा है। मुंबईकर नंदलाल पांडे ने इस मामले में कहा कि महायुति के इरादे नेक नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसी गड़बड़ी के जरिए वह सत्ता को हथियाना चाहती है। बता दें कि कल्याण-डोंबिवली में तो महायुति ने मतदान से पहले ही सत्ता की बिसात बिछा दी है। महायुति के ९ प्रत्याशी बिना चुनाव के ही जीत गए हैं। इस फंडे से अभी तक राज्य भर में महायुति के कुल २२ उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जबकि विपक्ष का दावा है कि अभी यह संख्या और बढेगी।
जनादेश की भावना पर सीधा हमला
इतनी बड़ी संख्या में प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना महज संयोग नहीं माना जा रहा। इसके पीछे सत्ताधारी दल की सुनियोजित रणनीति, दबाव की राजनीति और विरोधियों को मैदान से बाहर करने की योजना होने के आरोप लग रहे हैं। पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की रणनीति सफल रही, अब शिंदे गुट भी सीटों को गलत तरीके से कब्जियाने की राह पर चल पड़ा है। महायुति की यह रणनीति भले ही सत्ता के गणित में सफल दिख रही हो, लेकिन यह प्रक्रिया जनादेश की भावना पर सीधा हमला मानी जा रही है।
‘गड़बड़’ करके मनपा पर कब्जे की कोशिश!
महायुति ने मनपा चुनावों के दौरान निर्विरोध चुनाव जीतने की साजिश रची है। इसके तहत राज्य में कई प्रत्याशी जीत भी चुके हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि नाम वापसी के दौरान दबाव, डर और राजनीतिक सौदेबाजी के जरिए मुकाबला ही खत्म कर दिया जा रहा है। जनता को मतदान का अधिकार मिले, इससे पहले ही ‘मैनेजमेंट’ के जरिए मनपा पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। सवाल यह है कि जब चुनाव बिना वोट डाले ही तय हो जाएं, तो लोकतंत्र का अर्थ क्या रह जाता है?
यह है मामला
कल्याण-डोंबिवली के १२२ सदस्यीय मनपा में भाजपा-शिंदे गुट के ९ नगरसेवक निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इनमें भाजपा के ५ और शिंदे गुट के ४ उम्मीदवार शामिल हैं। यानी सत्ता के लिए जरूरी ६२ सीटों से महायुति अब केवल ५३ सीट दूर रह गई है। चुनाव से पहले ही सत्ता की ओर यह तेज रफ्तार लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। भाजपा की ओर से रेखा चौधरी, आसावरी नवरे, रंजना पेणकर, मंदा पाटील और ज्योति पवन पाटील सहित कई प्रत्याशी चुनाव से पहले ही चुन लिए गए हैं।

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