-संजय शिरसाट एक बार फिर भ्रष्टाचार के घेरे में फंसे
– मनसे नेता का जोरदार आरोप, सीएम को लिखा पत्र
-ठेकेदारों से अग्रिम राशि लेकर काम बांटने की शिकायत
सामना संवाददाता / मुंबई
सामाजिक न्याय विभाग में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। घाती गुट के मंत्री संजय शिरसाट के विभाग पर करोड़ों रुपयों की गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरोप है कि विभाग में टेंडर प्रक्रिया के नाम पर अग्रिम रकम लेकर कामों का बंटवारा किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद सामाजिक न्याय विभाग की कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं, जिससे सरकार की छवि पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट पर पिछले कुछ महीनों से लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं। शुरुआत में वे छत्रपति संभाजीनगर के एक होटल मामले में विवादों में घिरे थे। इसके बाद एक अन्य जमीन से जुड़े मामले में भी उनका नाम सामने आया। अविनाश जाधव ने अपने पत्र में संजय शिरसाट के कार्यालय में कार्यरत निजी सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही विभाग में ओएसडी के रूप में काम कर रहे एक अन्य शख्स के बिना किसी आधिकारिक आदेश के काम करने पर भी संदेह जताया गया है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि सामाजिक न्याय विभाग में हाल के समय में कई गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। विशेष रूप से विभिन्न योजनाओं में निधि वितरण प्रक्रिया में गड़बड़ी होने के आरोप लगे हैं। छात्रों के छात्रावास और उससे जुड़े कामों में ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के नाम पर अग्रिम राशि लेकर काम बांटे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
कमीशन की हो रही मांग
पत्र में यह भी आरोप है कि मंत्रालय के कुछ अधिकारी मंत्री कार्यालय का इस्तेमाल कर काम दिलाने के नाम पर विधायकों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित लोगों से कमीशन की मांग कर रहे हैं। ये सभी मामले बेहद गंभीर हैं और उनकी निष्पक्ष तथा विस्तृत जांच होना आवश्यक है। इसके अलावा सामाजिक न्याय विभाग में ओएसडी के रूप में एक शख्स के बिना किसी आधिकारिक आदेश के काम करने की शिकायत भी सामने आई है। इसलिए उनकी नियुक्ति और अधिकारों की जांच की भी मांग की गई है।
