-विपक्ष को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग अब निष्पक्ष जांच एजेंसियां नहीं रह गई हैं, बल्कि राजनीतिक हथियार बन चुकी हैं। इन एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने और उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन शब्दों में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत की पुस्तक के विमोचन में केंद्र सरकार पर हमला बोला।
नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के मावलणकर सभागार में आयोजित शिवसेना नेता और सांसद संजय राऊत की पुस्तक ‘नरकातला स्वर्ग’ के अंग्रेजी संस्करण ‘अनलाइकली पैराडाइज’ और हिंदी संस्करण ‘नरक में स्वर्ग’ के विमोचन कार्यक्रम के दौरान दिग्विजय सिंह ने संजय राऊत की सराहना करते हुए कहा कि आज आपके जैसे साहसी और सिद्धांतों पर टिके रहनेवाले लोग बहुत कम बचे हैं। आज हालात ऐसे हैं कि बड़े नेता और अधिकारी नोटिस मिलते ही झुक जाते हैं, लेकिन आपने समझौता करने के बजाय जेल जाना पसंद किया। यह आपके साहस और हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के प्रति आपकी निष्ठा का प्रतीक है। अरविंद केजरीवाल ने भी इसी तरह समझौता नहीं किया।
मोदी-शाह की जमीनी हकीकत है कुछ और
उन्होंने कहा कि मैं नरेंद्र मोदी और अमित शाह को इसलिए थोड़ा जानता हूं, क्योंकि वे हमारे पड़ोसी राज्य से आते हैं। उनका शासन मॉडल अलग है। उन्होंने कहा था ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। गुजरात के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुझे बताया था कि उनका मॉडल बहुत सरल है, जो अधिकारी आदेश मानता है, वह ‘ए’ वैâटेगरी में आता है, जो टालता है वह ‘बी’ में और जो नियमों की बात करता है, वह ‘सी’ वैâटेगरी में डाल दिया जाता है। ‘ए’ वैâटेगरी के अधिकारी भ्रष्टाचार में साझेदार बन जाते हैं और एक बार शामिल हो जाएं तो उन्हें कोई छू भी नहीं सकता।
१० प्रतिशत भी साबित नहीं होते एजेंसियों के दर्ज मामले
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि आज ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन एजेंसियों द्वारा दर्ज मामलों में से १० प्रतिशत भी साबित नहीं होते, लेकिन लोगों को जेल भेज दिया जाता है। जेल में जो कुछ होता है, वह संजय राऊत ने अपनी किताब में विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा कि कसाब को बिरयानी देने की बात एक झूठा प्रचार था, जिसे संजय राऊत ने अपनी किताब में उजागर किया है।
