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डिजिटल सख्ती के बहाने घोटालों पर पर्दा !

सामना संवाददाता / मुंबई
ई-केवाईसी और पेपरलेस वेतन प्रणाली को लेकर महायुति सरकार ने भले ही ‘डिजिटल सख्ती’ का बड़ा दावा किया हो, लेकिन इस पैâसले ने बीते वर्षों की गड़बड़ियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ३५५ सरकारी कार्यालयों में लागू की जा रही नई व्यवस्था और १९० दफ्तरों से हो रही इसकी शुरुआत को सरकार सुधार के रूप में पेश कर रही है, मगर विपक्ष इसे ‘देर से जागी कार्रवाई’ बता रहा है। आरोप है कि मंजूर पदों से ज्यादा कर्मचारियों को वेतन देने का खेल लंबे समय से चलता रहा, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की गई। ऐसे में ई-केवाईसी के बहाने सिस्टम को डिजिटल करने की कोशिश कहीं पुराने घोटालों पर पर्दा डालने की कवायद तो नहीं। इस तरह का सवाल लगातार उठ रहा है। विपक्ष का साफ कहना है कि असली परीक्षा अभी बाकी है, क्योंकि जनता के पैसे का पूरा हिसाब अभी भी सामने आना बाकी है।
राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारियों के वेतन बिल अब कोषागार कार्यालय को पूरी तरह पेपरलेस पद्धति से भेजने होंगे। पहले चरण में १९० कार्यालयों के कर्मचारियों के मई महीने के वेतन बिल ऑनलाइन भेजे जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण में वन, राजस्व, गृह, सार्वजनिक निर्माण, जल संसाधन जैसे अधिक कर्मचारियों वाले विभागों के वेतन बिल भी ऑनलाइन किए जाएंगे। इस प्रक्रिया से पहले हर कर्मचारी को अपने बैंक खाते की ‘ई-केवाईसी’ कराना अनिवार्य होगा। इस तरह की जानकारी कोषागार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दी है।
अब पूरी तरह पेपरलेस वेतन बिल
अभी तक हर महीने सरकारी वेतन बिलों के लगभग ३० बोरे भर जाते थे, जिन्हें दो कर्मचारी ट्रेन से अकाउंट जनरल कार्यालय तक ले जाते थे। अब हर सरकारी कार्यालय के आहरण एवं संवितरण अधिकारी को अपने कर्मचारियों के वेतन बिल ऑनलाइन भेजने होंगे। इस संबंध में पुणे के वित्त विभाग की सह-निदेशक भारती देशमुख ने डीडीओ को प्रशिक्षण भी दिया है। इससे पहले सभी कर्मचारियों को ई-केवाईसी कराना जरूरी होगा।
– वैभव राऊत, कोषागार अधिकारी

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