सुनील ओसवाल / मुंबई
नासिक के गंगापुर रोड स्थित पुलिस आयुक्तालय के पीछे की पुलिस वसाहत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब २७० पुलिस परिवारों के सिर से छत छिनने की आशंका के बीच सार्वजनिक बांधकाम विभाग की कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कुंभ मेले के नाम पर पुलिस परिवारों को हटाकर यहां पार्विंâग या अन्य उपयोग के लिए जगह खाली कराने की साजिश रची जा रही है, जबकि कुंभ जैसे आयोजन की अवधि सीमित होती है। सूत्रों के अनुसार, इस वसाहत में कई ऐसे पुलिस कर्मचारी हैं, जिनके पास स्वयं का घर नहीं है। ऐसे में उन्हें अचानक बेघर करने का निर्णय पुलिस महकमे में असंतोष और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है। जैसा कि १३ अप्रैल २०२६ को जारी की गई पीडब्ल्यूडी की वह नोटिस, जिसमें इन पुलिस चॉलो (इमारतों) को तोड़ने और निकलने वाले लकड़ी, लोहे आदि के की नीलामी की प्रक्रिया का उल्लेख है। इस परिसर में कुल १३ चॉली (१ से १२ और १४ नंबर) हैं, जिन्हें गिराने की तैयारी बताई जा रही है। हालांकि, यह जानकारी सामने आई है कि पुरानी इमारतें गिराकर नई इमारतें बनाने का विचार है, लेकिन इस पर अभी कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में जब नया प्लान तय ही नहीं, तो इतनी जल्दबाजी में तोड़-फोड़ क्यों? यह पूरी जमीन शहर के सबसे प्राइम लोकेशन में मानी जाती है। बाजार मूल्य के हिसाब से यह जमीन अरबों रुपए की बताई जा रही है। इसी वजह से शहर में यह चर्चा तेज है कि भविष्य में इस जमीन का निजीकरण कर नामी बिल्डर लॉबी को फायदा पहुंचाया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में इस पूरे प्रकरण को लेकर विपक्षी स्वर और पुलिस कर्मचारियों के बीच यह धारणा बन रही है कि सरकारी स्तर पर कोई बड़ा फैसला पर्दे के पीछे लिया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं गृहमंत्री भी हैं और उनके ही कार्यकाल में पुलिस कर्मचारियों को बेघर करने जैसा आदेश निकलने से पुलिस महकमे में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
