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ईंधन की किल्लत से चरमराई एसटी सेवा … २२ प्रतिशत डीजल पंप बंद!

-सरकार सुस्त, फैसलों में देरी, जनता त्रस्त
– बीपीसीएल की ५५ पंपों पर सप्लाई ठप्प

सुनील ओसवाल / मुंबई
राज्य परिवहन की रीढ़ मानी जानेवाली राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) सेवा आज सरकारी लापरवाही और पैâसलों में देरी के कारण गंभीर संकट से गुजर रही है। डीजल की कमी ने राज्य के ५५ डिपोज की बस सेवा को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे हजारों यात्रियों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है।
एसटी के पास कुल २५१ डीजल पंप हैं, जिनमें से ५५ बीपीसीएल के पंप पिछले एक महीने से बंद पड़े हैं, क्योंकि उनका करार समाप्त हो चुका है। इसके चलते कई आगारों की बसों को डीजल भरवाने के लिए दूसरे डिपो पर जाना पड़ रहा है।
एसटी को प्रतिदिन लाखों लीटर डीजल की जरूरत होती है और इस पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। खर्च कम करने के लिए सस्ते विकल्प पर विचार किया गया, प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन वित्तीय मंजूरी के अभाव में पूरा मामला फाइलों में अटक गया। नतीजा यह हुआ कि जमीन पर व्यवस्थाएं चरमराने लगीं।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ डीजल पंपों का करार खत्म होने के बाद उन्हें बंद कर दिया गया। वैकल्पिक व्यवस्था समय पर नहीं होने से कई आगारों की बसों को दूसरे स्थानों पर डीजल भरवाने भेजा जा रहा है। इससे दूरी बढ़ी, समय बर्बाद हुआ और बसों की नियमितता पूरी तरह बिगड़ गई।

डीजल पंप बंद, सिस्टम चरमराया
डिपोज पर बसों की लंबी कतारें लग रही हैं। चालक घंटों इंतजार कर रहे हैं, और इस देरी का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। कई रूटों पर बसें लेट हो रही हैं या फेरे कम किए जा रहे हैं। गर्मी के मौसम में जब सेवा बढ़नी चाहिए थी, तब उलटे यात्री संख्या और आय दोनों पर चोट पड़ रही है। पहले से आर्थिक दबाव झेल रही एसटी को इस अव्यवस्था ने और कमजोर कर दिया है। कुछ मार्गों पर फेरे घटाने पड़े, जिससे आय में गिरावट दर्ज की गई है। यह पूरा मामला सिर्फ डीजल की कमी का नहीं, बल्कि योजना और समन्वय की कमी का उदाहरण बन गया है।

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