सरकार की चुप्पी पर यात्रियों का बढ़ा गुस्सा
सामना संवाददाता / मुंबई
कोरोना काल के बाद से बंद पड़ी दादर-रत्नागिरी पैसेंजर ट्रेन को उसके मूल स्थान दादर से ही दोबारा शुरू करने की मांग अब तेज होती जा रही है। इस मुद्दे पर आयोजित महाराष्ट्र परिषद में शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि रेल प्रशासन को दिवा से इस ट्रेन को शुरू करने के निर्णय को रद्द करते हुए ट्रेन को पुराने रुट पर जल्द बहाल करना होगा। नहीं तो मई महीने में ‘रेल रोको’ आंदोलन छेड़ा जाएगा।
रविवार को आयोजित इस परिषद में बड़ी संख्या में यात्री, रेलवे संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता जुटे। सभी ने एक सुर में कहा कि यह सिर्फ एक ट्रेन का सवाल नहीं, बल्कि मराठी और कोकण के लोगों के हक और अस्तित्व का मामला है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कोरोना के बाद ट्रेन को दादर की बजाय दिवा से शुरू करना यात्रियों के साथ अन्याय है, जिससे रोजाना सफर करनेवालों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सांसद अरविंद सावंत ने केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्णय लेनेवाली ताकतें महाराष्ट्र के स्थानीय लोगों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही हैं।
सड़कों पर उतरने को तैयार
ठाणे रेलवे प्रवासी संस्था के अध्यक्ष नंदकुमार देशमुख ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इस ट्रेन के चालू होने से स्थानीय व्यापार और रोजगार को मजबूती मिलेगी। वहीं अंधेरी पूर्व निवासी कोकणवासी जयसिंह कदम ने ‘जनशक्ति फाउंडेशन’ के माध्यम से पहले ही इस मुद्दे को उठाया था और अब आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि कोकणवासियों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने को तैयार है। सरकार अगर अब भी नहीं जागी तो पटरियों पर संघर्ष तय माना जा रहा है।
