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‘विधान परिषद’ चुनाव, अंदरूनी कलह तेज… शिंदे खेमे में ‘टिकट वॉर’! …गोर्‍हे और कडू के नाम पर मचा बवाल

-वरिष्ठ नेताओं ने जताई नाराजगी
– निष्ठावानों को टिकट देने की मांग

सामना संवाददाता / मुंबई
विधान परिषद चुनाव से पहले शिंदे गुट में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। शिंदे गुट में ‘टिकट वॉर’ ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। नीलम गोर्‍हे और बच्चू कडू के नाम सामने आते ही पार्टी के भीतर जबरदस्त बवाल मच गया है, जहां खुद वरिष्ठ नेता ही खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि जब पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता वर्षों से मौके का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस खींचतान ने नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और अब ३० अप्रैल की डेडलाइन से पहले पैâसला लेना शिंदे गुट के लिए अग्निपरीक्षा बन गया है। फिलहाल, सबकी नजरें उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के फैसले पर टिकी हैं।
राज्य में विधान परिषद की ९ सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बारामती और राहुरी उपचुनाव की गूंज अभी थमी भी नहीं है कि अब १२ मई को होने वाले विधान परिषद चुनाव पर सबकी नजरें टिक गई हैं। इस चुनाव को लेकर शिंदे गुट में तेज राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर पार्टी के भीतर ही नाराजगी उभरकर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, उप मुख्यमंत्री शिंदे ने विधान परिषद की पूर्व उपसभापति नीलम गोर्‍हे और प्रहार संगठन के प्रमुख बच्चू कडू के नाम तय किए थे। हालांकि, इन दोनों नामों का पार्टी के भीतर से ही कड़ा विरोध हो रहा है। शिंदे गुट के कुछ वरिष्ठ मंत्री और नेताओं ने नीलम गोर्‍हे की उम्मीदवारी पर असहमति जताई है।
नए चेहरों को मौका दो
असंतुष्टों का कहना है कि जैसे राज्यसभा के लिए ज्योति वाघमारे के रूप में एक नया और आक्रामक चेहरा सामने लाया गया, उसी तरह विधान परिषद के लिए भी नए चेहरों को मौका दिया जाना चाहिए। पुराने चेहरों को दोबारा मौका देने के बजाय निष्ठावान कार्यकर्ताओं को अवसर देने की मांग जोर पकड़ रही है। दूसरी ओर बच्चू कडू के नाम को लेकर भी शिंदे गुट में हलचल तेज हो गई है।
नेताओं ने उठाया सवाल
कुछ नेताओं ने सवाल उठाया है कि बच्चू कडू का शिंदे गुट से क्या संबंध है। शर्त रखी गई है कि पार्टी के कोटे से उन्हें टिकट देना है तो पहले उन्हें अपनी ‘प्रहार जनशक्ति संगठन’ का शिंदे गुट में विलय करना होगा। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। शिंदे गुट के पास विधानसभा में ५७ विधायकों का समर्थन है।

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