मुख्यपृष्ठनए समाचारसोमवार को पश्चिम बंगाल किसका होगा, ममता का या भाजपा का?

सोमवार को पश्चिम बंगाल किसका होगा, ममता का या भाजपा का?

अनिल मिश्र / कोलकाता से रिपोर्ट

इस वर्ष देश के पांच राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल चुनाव की रही है। डेढ़ महीने से अधिक समय तक चली लंबी चुनाव प्रक्रिया के बाद अब राज्य की जनता और राजनीतिक दल सोमवार, 4 मई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी करेगी या भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पहली बार राज्य में सरकार बनाएगी।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का लंबा और जोरदार दौर अब समाप्त हो चुका है और सभी की नजरें परिणामों पर टिकी हैं। दो चरणों में मतदान के बाद कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान भी कराया गया। हालांकि मतगणना 4 मई को होनी है, लेकिन राजनीतिक दल अभी से ही आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं।

एक्जिट पोल और सट्टा बाजार में तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ सर्वे भारतीय जनता पार्टी को बढ़त दिखा रहे हैं, तो कुछ में तृणमूल कांग्रेस की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित बीजेपी के कई स्टार प्रचारकों ने जोरदार अभियान चलाया। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और अन्य नेताओं ने भी पूरी ताकत झोंक दी।

चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक टकराव और तनाव भी देखने को मिला। मतदान के बाद कुछ स्थानों पर हिंसा की घटनाएं सामने आईं। ईवीएम की सुरक्षा को लेकर भी विवाद हुआ, जहां विभिन्न दलों ने स्ट्रांग रूम की निगरानी को लेकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता की भवानीपुर सीट के स्ट्रांग रूम तक पहुंचीं, जो एक असामान्य घटना रही।

इस बीच Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को वैध ठहराया और टीएमसी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को अपने कर्मचारियों के चयन का अधिकार है और केंद्रीय कर्मचारियों की निष्पक्षता पर संदेह करना उचित नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मतगणना के दौरान उम्मीदवारों के प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।

पश्चिम बंगाल का इतिहास राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा से जुड़ा रहा है। नक्सलबाड़ी आंदोलन से लेकर विभिन्न राजनीतिक संघर्षों तक, राज्य ने कई दौर देखे हैं। 1977 से 2011 तक वाम मोर्चा का लंबा शासन रहा, जिसके बाद 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने सत्ता संभाली और राजनीतिक परिदृश्य बदल गया।

पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि बीजेपी 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनी। इस बार मुकाबला और कड़ा माना जा रहा है।

अब सबकी निगाहें 4 मई पर टिकी हैं। करीब छत्तीस घंटे बाद यह तय हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल की सत्ता पर फिर ममता बनर्जी का कब्जा होगा या बीजेपी पहली बार यहां सरकार बनाने में सफल होगी।

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