अनिल तिवारी
पुणे जिले के चाकण परिसर के खालुंब्रे में तीन वर्ष के मासूम की हत्या ने पुलिस जांच के सामने एक बेहद संवेदनशील और क्रूर अपराध की परतें खोल दीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृत बच्चे की मां क्षेत्र में मजूरी का काम करती है। शुक्रवार दोपहर बच्चा अचानक लापता हुआ। पहले परिवार ने आसपास खोजबीन की। नालों, गलियों और मजदूर बस्तियों में तलाश के बाद भी जब बच्चा नहीं मिला, तो पुलिस को सूचना दी गई।
जांच की पहली दिशा बच्चे के गायब होने की समय-सीमा तय करने से शुरू हुई। पुलिस ने आसपास रहने वालों से पूछताछ की और क्षेत्र की बंद खोलियों तथा संदिग्ध स्थानों की तलाशी ली। इसी दौरान एक बंद कमरे पर पुलिस को संदेह हुआ। दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया तो कमरे में रखे एक सूटकेस से बच्चे का रक्तरंजित शव मिला। शव की स्थिति और घटनास्थल से मिले प्राथमिक संकेतों ने साफ कर दिया कि यह सामान्य हत्या नहीं, बल्कि यौन अपराध के बाद साक्ष्य छिपाने की कोशिश का मामला है। जांच में सामने आया कि संदिग्ध आरोपी घटना के बाद कमरे को बाहर से बंद कर फरार हो गया था। पुलिस ने उसके संभावित भागने के रास्तों, रेलवे स्टेशन और तकनीकी सुरागों पर काम शुरू किया। इसी आधार पर चाकण और दक्षिण म्हाळुंगे पुलिस की टीम पुणे रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां आरोपी बिहार जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रहा था। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। आरोपी अल्पवयस्क बताया जा रहा है और वह करीब एक महीने पहले बिहार से चाकण में मजदूरी के लिए आया था। इस अपराध में जांच के प्रमुख तत्व हैं बच्चे का अंतिम बार कहां देखा जाना, आरोपी के कमरे तक पहुंचना, कमरे का बंद होना, सूटकेस में शव छिपाना, हत्या में इस्तेमाल हथियार, मेडिकल रिपोर्ट और आरोपी का फरार होने का प्रयास। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने अपराध अचानक किया या पहले से बच्चे को निशाना बनाया था।
ऐसी घटनाएं बताती हैं कि मजदूर बस्तियों, किराएदार कमरों और अस्थायी कामगारों के सत्यापन में गंभीर चूक होती है। पुणे जिले में हाल में नाबालिग बच्चों से जुड़े अन्य यौन अपराध और हत्या के मामलों ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था केवल परिवार के भरोसे क्यों छोड़ी जा रही है। इस तरह के अपराध विकृत मानसिकता, अवसरवादी हिंसा और कमजोर निगरानी के घातक मेल का परिणाम हैं।
एआई ने खोज डाले
१०० से ज्यादा छिपे ग्रह
अंतरिक्ष की अनंत खामोशी में छिपे ग्रहों को खोजने की दिशा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट यानी टीएएसएस मिशन के आंकड़ों की पड़ताल करते हुए शोधकर्ताओं ने रेवन नामक एआई पाइपलाइन की मदद से ११८ ग्रहों की पुष्टि की है। इनमें ३१ ऐसे एक्सोप्लैनेट हैं, जिन्हें पहली बार पहचाना गया है। इसके अलावा २,००० से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले संभावित ग्रह भी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें करीब १,००० नए ग्रह हैं। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने २२ लाख से अधिक तारों के प्रकाश-आंकड़ों को खंगाला। टेस मिशन तारों की चमक में आने वाली बेहद सूक्ष्म कमी को दर्ज करता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो तारे की रोशनी थोड़ी देर के लिए कम होती है। इसी संकेत को ‘ट्रांजिट’ कहा जाता है। रेवन ने मशीन लर्निंग की मदद से यह परखा कि प्रकाश में आई कमी सचमुच ग्रह के कारण है या किसी अन्य खगोलीय भ्रम, जैसे दोहरे तारों या तकनीकी शोर के कारण। स्टडी की प्रमुख लेखिका डॉ. मरीना लाफार्गा मैग्रो के अनुसार, यह नजदीकी कक्षा वाले ग्रहों का अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यवस्थित नमूना है। शोध में खास तौर पर उन ग्रहों पर ध्यान दिया गया जो अपने तारों के बहुत करीब हैं और १६ दिनों से कम समय में अपनी परिक्रमा पूरी कर लेते हैं। यह खोज सिर्फ ग्रहों की संख्या बढ़ानेभर की उपलब्धि नहीं है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि तारों के बहुत पास ग्रह वैâसे बनते हैं, कौन से ग्रह टिक पाते हैं और किन परिस्थितियों में वे नष्ट हो जाते हैं। रेवन जैसी एआई तकनीक आने वाले समय में अंतरिक्ष-अनुसंधान की गति कई गुना बढ़ा सकती है। अब लाखों तारों के डेटा में छिपे संकेत मानव आंखों की प्रतीक्षा नहीं करेंगे एआई उन्हें पहचानकर ब्रह्मांड की नई खिड़कियां खोलता जाएगा।
